उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित चातुर्मासिक आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला में बुधवार को साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि संसार में भटकती हुई आत्मा को वास्तविक शांति तभी मिल सकती है, जब जीवन का अंतिम लक्ष्य स्पष्ट हो। जब तक मनुष्य अपने उद्देश्य का निर्धारण नहीं करेगा, तब तक वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य संसार में उलझना या भटकना नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और मोक्ष की ओर अग्रसर होना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि परमात्मा केवल मार्ग दिखाते हैं, लेकिन उस मार्ग पर चलने का पुरुषार्थ प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं करना पड़ता है। मंजिल कितनी भी दूर या निकट क्यों न हो, उसे प्राप्त करने का समय हमारी गति और प्रयास पर निर्भर करता है। केवल प्रश्न पूछने से नहीं, बल्कि सही दिशा में निरंतर चलने से लक्ष्य की प्राप्ति होती है।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि शुद्ध भाव और निर्मल आशय से किया गया प्रभु स्मरण विशेष फलदायी होता है। केवल बाहरी क्रियाएं करने से तत्वज्ञान की प्राप्ति नहीं होती। यदि परमात्मा की वाणी और उसके वास्तविक अर्थ को समझे बिना धार्मिक क्रियाएं की जाएं, तो वह केवल श्बाल तपश् कहलाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति अवश्य होती है और देवलोक का सुख भी मिलता है, लेकिन परम लक्ष्य मोक्ष नहीं मिलता।
उन्होंने ईर्ष्या और अभिमान को आत्मिक प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि पुण्य का सुख भी सीमित होता है। देवलोक में अभाव, बीमारी और कष्ट नहीं होते, लेकिन वहां का सुख भी स्थायी नहीं है। अंततः परमात्मा की वाणी और तत्वज्ञान ही आत्मा को मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
प्रवचन के दौरान उन्होंने तेजपाल-वस्तुपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन्होंने 1313 मंदिरों का निर्माण कराया और हजारों लोगों को भोजन करवाया, वे भी अंतिम समय में सांसारिक वस्तुओं की याचना करते दिखाई दिए। इससे स्पष्ट होता है कि केवल बाहरी पुण्य नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और सम्यक दर्शन ही जीवन का वास्तविक धन है।
प्रवचन से पूर्व साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमनरुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रवचन का श्रवण कर आत्मकल्याण का संदेश ग्रहण किया।
लक्ष्य स्पष्ट होगा तभी मिलेगी आत्मा को शांति और मोक्ष की मंजिलःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
