उदयपुर, 5 अगस्त। देवेंन्द्र धाम में चल रहे चातुर्मास में महावीर समवसरण स्थल पर प्रवचनमाला में बुधवार को प्रवचन देते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि भक्ति व्यक्ति के हृदय में भगवान के प्रति आस्था, श्रद्धा और समर्पण का भाव जागृत करती है। सच्ची भक्ति के माध्यम से ही भगवान की प्राप्ति संभव है।
उन्होंने कहा कि भक्ति के तीन स्वरूपकृश्रवण, वाचन और चिंतनकृजीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। श्रवण से ज्ञान प्राप्त होता है, चिंतन से उसका आत्मसात होता है और भक्ति के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि केवल बाहरी आडंबरों से नहीं, बल्कि शुद्ध भावों और आत्मचिंतन से प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। यदि जीवन में सच्ची भक्ति और श्रद्धा का समावेश हो जाए तो आत्मा का उत्थान निश्चित है। उन्होंने बताया कि आत्मज्ञान के बिना जीवन अधूरा है और आत्मकल्याण के लिए सदैव धर्म, साधना एवं सत्संग का आश्रय लेना चाहिए।
प्रवचन में प्रवर्तक डॉ राजेन्द्र मुनि ने भक्ति के साथ ज्ञान और वैराग्य की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि मनुष्य जब तक आत्मस्वरूप को नहीं पहचानता, तब तक उसका जीवन वास्तविक सुख और शांति से वंचित रहता है। आत्मचिंतन, संयम और सदाचार के माध्यम से ही मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में उपाध्याय रमेश मुनि ने मंगल भावना व्यक्त की। समाज के अध्यक्ष रोशनलाल जैन, त्रिशला कावड़िया, दिनेश हिंगड़ ने लकी ड्रा में चयनित श्रावकों का बहुमान किया। अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
भक्ति और श्रद्धा से ही भगवान की प्राप्ति संभवःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
