उदयपुर, 3 जून। सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस (सीएमएफ) और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) ने टाटा ट्रस्ट्स और राजस्थान स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (आरएससीईआरटी) के सहयोग से बुधवार को उदयपुर के अमंत्रा शिल्पी रिसॉर्ट में राजस्थान राज्य स्तरीय टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे (टीएलपीएस) 2025 रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट राजस्थान के विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में कक्षा 1 और 2 के बच्चों की पढ़ाई और शिक्षण व्यवस्था को समझने के साथ-साथ शुरुआती शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कक्षा में अपनाए जा रहे तरीकों पर रोशनी डालती है। रिपोर्ट का औपचारिक विमोचन आरएससीईआरटी की निदेशक श्वेता फागेरिया ने किया। कार्यक्रम में डाइट के प्रतिनिधि, सीकर और बांसवाड़ा के सरकारी अधिकारी, आरएससीईआरटी राजस्थान के अधिकारी तथा उदयपुर स्थित विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के सदस्य उपस्थित रहे।
टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे (टीएलपीएस) 2025 नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच देश के 9 राज्यों में आयोजित किया गया था। दिसंबर 2025 में राष्ट्रीय टीएलपीएस 2025 रिपोर्ट जारी होने के बाद अब राजस्थान रिपोर्ट राज्य में शुरुआती कक्षाओं में भाषा और गणित की पढ़ाई के तरीकों को और करीब से समझने का अवसर प्रदान करती है। राजस्थान में यह सर्वे राज्य शिक्षा विभाग और सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस (सीएमएफ) के सहयोग से किया गया। इसके तहत सीकर और बांसवाड़ा जिलों के 100 स्कूलों और 100 कक्षाओं को शामिल किया गया तथा कक्षा 1 और 2 के 100 शिक्षकों की कक्षा में पढ़ाने की गतिविधियों का अवलोकन किया गया।
आरएससीईआरटी की निदेशक श्वेता फागेरिया ने कहा, ‘बच्चों को सीखाने के लिए शिक्षा पद्वतियों में सीखने के तरीकों को रूचिपूर्ण बनाने के लिए निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कक्षा कक्ष में हो रही प्रक्रियाओं को जानने का प्रयास टीएलपीएस के माध्यम से समझना बेहतर होगा। बच्चों को सीखने के लिए स्कूल की कक्षाओं में ओआरएफ के लिए जो अभियान चलाया गया, उसके अनुभव और टीएलपीएस के आंकड़ों को समन्वित करके अधिगम को आसान बना कर बच्चों और शिक्षकों के लिए सीखने सिखाने का वातावरण बेहतर बनाना हम सब की जिम्मेदारी है।’
लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक डॉ. धीर झिंगरन ने कहा कि राजस्थान टीएलपीएस के निष्कर्ष हमें शुरुआती कक्षाओं में पढ़ाई और शिक्षण के तौर-तरीकों की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करते हैं। बच्चों की सीखने की प्रक्रिया तब बेहतर होती है, जब वे पढ़ाई में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं। यह रिपोर्ट समझने में मदद करती है कि कक्षा में अपनाए जा रहे तरीके बच्चों की इस भागीदारी को कितनी मजबूती दे रहे हैं। हमें उम्मीद है कि यह रिपोर्ट राजस्थान में शुरुआती वर्षों की शिक्षा को और बेहतर बनाने तथा शिक्षण पद्धतियों को मजबूत करने पर सार्थक चर्चा को बढ़ावा देगी।
राजस्थान से जुड़े निष्कर्ष कक्षाओं में अपनाई जा रही कई सकारात्मक शिक्षण पद्धतियों के साथ-साथ सुधार की संभावनाओं को भी सामने लाते हैं। सर्वे में पाया गया कि 79 प्रतिशत कक्षाओं में पढ़ाई से जुड़ी सामग्री उपलब्ध थी, लेकिन इनमें से केवल 65 प्रतिशत सामग्री ही बच्चों की नजर और पहुंच के स्तर पर रखी गई थी। वहीं, कक्षा का अधिकांश समय शिक्षक केंद्रित गतिविधियों में बीता। 67 प्रतिशत समय शिक्षक आधारित गतिविधियों पर खर्च हुआ, जबकि विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी वाली गतिविधियों को केवल 17 प्रतिशत समय मिला। इन निष्कर्षों के आधार पर रिपोर्ट में बच्चों की कक्षा में भागीदारी बढ़ाने, पढ़ाई को अधिक विद्यार्थी केंद्रित बनाने तथा बच्चों के सीखने का आकलन करने और उनकी जरूरतों के अनुसार शिक्षण पद्धतियों को और मजबूत करने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं।
रिपोर्ट विमोचन कार्यक्रम ने नीति निर्माताओं, आरएससीईआरटी, डाइट, शिक्षकों और नागरिक समाज संगठनों को एक साझा मंच पर लाकर इस बात पर चर्चा का अवसर दिया कि कक्षाओं से मिले इन निष्कर्षों का उपयोग राजस्थान में शुरुआती शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कैसे किया जा सकता है। साथ ही, यह भी चर्चा हुई कि राज्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में अपने प्रयासों को कैसे और मजबूत कर सकता है।
लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के बारे में
वर्ष 2015 में स्थापित लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) एक गैर-लाभकारी शैक्षणिक संस्था है, जो भारत में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) को बेहतर बनाने के लिए काम करती है।
एलएलएफ एक परिणाम-केंद्रित संस्था है, जो बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों पर काम करती है, जिसमें शिक्षकों और मेंटर्स का निरंतर क्षमता विकास, जिला स्तर पर प्रदर्शन कार्यक्रम और एफएलएन से जुड़े शिक्षा तंत्र को मजबूत बनाना शामिल है। संस्था का बहुभाषी शिक्षा (एमएलई) मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि आदिवासी और भाषाई विविधता वाले समुदायों के बच्चे अपनी परिचित भाषा में सीखने की शुरुआत कर सकें और धीरे-धीरे अन्य भाषाओं में भी दक्षता हासिल कर सकें। एलएलएफ का विशेष फोकस उन बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने पर है, जो सामाजिक, भौगोलिक या भाषाई कारणों से अक्सर मुख्यधारा से पीछे रह जाते हैं।
स्थापना के बाद से एलएलएफ ने देश के 10 राज्यों में काम किया है। संस्था राज्य स्तरीय तकनीकी सहयोग के माध्यम से 2.18 करोड़ बच्चों और 11.8 लाख शिक्षकों व शिक्षाविदों तक पहुँच स्थापित कर चुकी है। वहीं, जिला स्तरीय प्रदर्शन कार्यक्रमों के जरिए 14 लाख बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार लाने और 2.75 लाख शिक्षकों एवं शिक्षक-प्रशिक्षकों की शिक्षण पद्धतियों को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।
कार्यक्रम के दौरान एलएलएफ के सीनियर एकेडमिक स्पेशलिस्ट अजय गुप्ता और सीएमएफ के जनरल मैनेजर विजय सिंह ने टीएलपीएस राजस्थान रिपोर्ट के उद्देश्य, सर्वे की प्रक्रिया, प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों की जानकारी साझा की। इस अवसर पर आरएससीईआरटी, उदयपुर के प्रोफेसर-1 पीयूष जैन, बांसवाड़ा के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी पवन के. रावल, आरएससीईआरटी, उदयपुर की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीषा उज्ज्वल तथा टाटा ट्रस्ट्स की प्रोग्राम मैनेजर ज्योत्सना सहित कई गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।
एलएलएफ और सीएमएफ ने टाटा ट्रस्ट्स के सहयोग से राजस्थान टीएलपीएस 2025 रिपोर्ट जारी की
