साइबर ठगों पर कोटा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, भीलवाड़ा से 2 गिरफ्तार

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

• ठगी की राशि एयर-टीएम एप्प के माध्यम से यूएसडीटी में कन्वर्ट करवा लेते, 5 महीने एक करोड़ की रकम को कराया कन्वर्ट

जयपुर, 4 जून। साइबर ठगी के खिलाफ कोटा शहर की साइबर पुलिस ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। एक विस्तृत जांच और कार्रवाई के बाद पुलिस ने भीलवाड़ा से दो शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जो नौकरी के बहाने लोगों से लाखों रुपये ठग कर क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदल देते थे।
मामले की शुरुआत
यह मामला 27 मार्च, 2025 को तब सामने आया जब विज्ञान नगर निवासी सलमान ने साइबर पुलिस थाना कोटा शहर में एक रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्हें टेलीग्राम ऐप पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था. ठगों ने उन्हें “कंटेंट स्क्वायर कम्पनी” से संबंधित एक लिंक शेयर किया और प्रोडक्ट रेटिंग के नाम पर पैसा कमाने का लालच दिया। इस झांसे में आकर सलमान ने अलग-अलग बैंक खातों में लगभग 20 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। शिकायत दर्ज होने के बाद, पुलिस ने तुरंत बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस की मुस्तैदी और गिरफ्तारी
एसपी सिटी डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिलीप सैनी के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम का नेतृत्व उप अधीक्षक एवं थानाधिकारी साइबर थाना विनोद कुमार और पुलिस निरीक्षक सतीश चंद ने किया। टीम ने मामले की गहनता से जांच की और “लेयर वाइज मनी ट्रेल शीट” तैयार की। बैंकों से प्राप्त रिकॉर्ड, संदिग्ध वेबसाइटों के डोमेन संबंधित रिकॉर्ड और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का बारीकी से विश्लेषण किया गया।
इस विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों दानिश खान (20) निवासी शिव नगर प्रताप नगर भीलवाड़ा और मनोज कुमार (25) निवासी रामदेव जी मंदिर के पास रासेड पारोली भीलवाड़ा की पहचान की। 3 जून को दोनों अभियुक्तों को भीलवाड़ा से दबोच लिया गया। उन्हें माननीय न्यायालय कोटा में पेश किया गया, जहां से उन्हें 2 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किए गए 2 मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
ठगी का शातिराना तरीका
पुलिस की प्रारंभिक जांच में ठगों के शातिराना तरीके का खुलासा हुआ है। ये दोनों अभियुक्त गिरोह को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। गिरोह के अन्य सदस्य पीड़ितों को फर्जी लिंक भेजकर ठगी की रकम इन खातों में प्राप्त करते थे। इसके बाद ठगी की गई राशि को “अमेजन-पे” के माध्यम से गिफ्ट कार्ड खरीदकर “एयर-टीम ऐप” के ज़रिए “यूएसडीटी ” नामक क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था।
अंत में इन यूएसडीटी को बिनांस ऐप के माध्यम से बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था। अभियुक्त मनोज कुमार के ऐप से प्राप्त रिकॉर्ड से पता चला है कि मई 2025 में अकेले उसके खाते के माध्यम से 16 लाख 43 हज़ार रुपये की ठगी की राशि को यूएसडीटी में कन्वर्ट किया गया था। यह दर्शाता है कि यह गिरोह बड़े पैमाने पर इस तरह की ठगी कर रहा था।
आगे की जांच और रिकवरी
पुलिस की तत्परता से पीड़ित सलमान को करीब 2 लाख रुपये की राशि वापस दिलवाई जा चुकी है। हालांकि, मामले में अभी भी अनुसंधान जारी है और पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
यह कार्रवाई साइबर ठगों को एक कड़ा संदेश देती है कि कानून से बचना मुश्किल है और साइबर पुलिस ऐसी गतिविधियों पर लगातार नज़र रख रही है। जनता से अपील की गई है कि वे नौकरी या पैसे कमाने के ऐसे किसी भी ऑनलाइन प्रलोभन से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध लिंक या ऑफर पर क्लिक न करें।

By Udaipurviews

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