स्मार्ट मीटर लगाने वाले कर्मचारियों को बिना वेतन दिए कम्पनी प्रबंधन फरार

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर।  उदयपुर में स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका जीनस कम्पनी को दिया गया। जीनस कम्पनी ने यह ठेका दीप इन्फ्रा प्रा.लि. को दिया और दीप इन्फ्रा प्रा.लि. ने लगभग 85 कर्मचारियों को नवम्बर 2025 में नियुक्त कर उदयपुर में स्मार्ट मीटर लगवाए। इन कर्मचारियों को दीप इंफ्रा कंपनी ने अप्रैल 2026 से 10 मई 2026 तक का वेतन दिए बिना माछला मगरा स्थित कार्यालय को बंद कर दिया और कंपनी के प्रबंधन जयराज सिंह जडेजा, उसकी पत्नी दीपाली बा लालु बा चुडासमा और कंपनी का मैनेजर घनश्याम तोगजी जडेजा 10 मई 2026 को ही फरार हो गए। बताया गया कि अक्टूबर 2025 में समाचार पत्र में उदयपुर में दीप इन्फ्रा कम्पनी ने स्मार्ट मीटर लगाये जाने के लिए कर्मचारियों की भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया। कई युवा इस भर्ती के लिए पहुंचे तो दीप इन्फ्रा कम्पनी के जयराज सिंह जडेजा ने अपने को कंपनी का मालिक होना बताया कि उदयपुर में स्मार्ट मीटर लगाने का कह न्यूनतम वेतन 22,500/-रुपये और योग्यता अनुसार अधिक वेतन भी भुगतान करने को कहा। साथ ही भविष्य निधि राशि भी कटौति कर भविष्य निधि खाते में जमा कराने का कहा। जिस पर लगभग 80 बेरोजगार युवा जयराज सिंह जडेजा के कहने पर अक्टूबर, 2025 में उदयपुर में मेवाड़ मोटर्स गली में स्थित एक कार्यालय में मिले। उस समय उनकी पत्नी दीपालीबा लालूबा चुडासमा एवं घनश्याम तोगजी जडेजा (मैंनेजर) भी वहां मौजुद थे, उन सभी ने भी युवाओं को विश्वास दिलाया कि “आप सभी नौकरी ज्योईन कर लो और आप सभी को समय पर वेतन दिया जावेगा और यह प्रोजेक्ट 15 वर्षो का है, जिसमें समय-समय पर आपको वेतन भी बढाकर दिया जावेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को सैलरी पर नहीं रख रहे है, उन्हें प्रति मीटर लगाने पर 100/-रु., 120/-रु. के हिसाब से राशि भुगतान की जावेगी। ऐसे में लगभग 80 बेरोजगार युवाओं ने माह नवम्बर, 2025 में उदयपुर शहर में स्मार्ट मीटर लगाने हेतु नौकरी ज्वाइन कर ली जिस पर उन्हें  जीनस कम्पनी  का ज्योईन एवं आईडी कार्ड दिया गया। बताया गया कि इन युवाओं ने नवम्बर 2025 से 10 मई, 2026 तक लगातार उदयपुर शहर में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य किया, इस दौरान उन्हें माह नवम्बर, 2025 से माह जनवरी, 2026 तक के देय राशि का समय पर भुगतान किया गया और उनके देय वेतन में से 2200/-रु. प्रतिमाह भविष्य निधि खाते में जमा कराने के लिए भविष्य निधि राशि भी कटौती की गयी, लेकिन कंपनी की ओर से उन युवाओं को भविष्य निधि खाता उपलब्ध नहीं कराया गया और माह फरवरी, 2026 का देय वेतन समय पर नहीं दिया गया तो युवाओं ने जयराज सिंह जडेजा, दीपालीबा लालूबा चुडासमा और घनश्याम तोगजी जडेजा से कई बार व्यक्तिशः सम्पर्क कर एवं फोन कर देय वेतन भुगतान करने का आग्रह किया, लेकिन वह हर बार टालमटोल का जवाब देते रहे। उन युवाओं ने  जीनस कंपनी   के अधिकारियों से भी इस बारे में बात कर उनकी राशि का भुगतान करने का आग्रह किया, लेकिन वे भी टालमटोल करते रहे। इन हालात में भी उन युवाओं ने 10 मई, 2026 तक लगातार कार्य किया और लगभग उन युवाओं ने उदयपुर में 16000 मीटर लगाये। इस दौरान दीप इंफ्रा प्रा. लि. का कार्यालय 1-सी.एच.-5, माछला मगरा, उदयपुर रहा।
बताया गया कि दीप इंफ्रा प्रा. लि. की ओर से उनके नाम से जो भविष्य निधि राशि कटौती की गई वह राशि भी भविष्य निधि खाता में जमा नहीं करवाई और न ही उन्हें कोई भविष्य निधि खाता नम्बर दिया गया तथा दिनांक 09.05.2026 को दीपालीबा लालूबा चुडासमा, जयराज सिंह जडेजा एवं घनश्याम तोगजी जडेजा उदयपुर से बिना बताए कहीं फरार हो गये और उनके मोबाईल नम्बर भी बंद आ रहे है। उन युवाओं ने इस बारे में  जीनस कंपनी  के अधिकारियों से बातचीत की तो वह भी कोई संतोषप्रद जवाब नहीं देकर टालमटोल जवाब दिया गया। इस तरह दीपालीबा लालूबा चुडासमा, जयराज सिंह जडेजा एवं घनश्याम तोगजी जडेजा और ळम्छन्ै ब्वउचंदल के अधिकारियों ने मिलीभगत एवं षड़यंत्र कर इन युवाओं के लगभग 30,00,000 रुपए धोखाधड़ी से हड़प लिए। उदयपुर में स्मार्ट मीटर लगाने वाले युवाओं के साथ धोखाधड़ी कर उनके वेतन की राशि हड़प कर उदयपुर से भाग जाने वालों के विरूद्ध कार्यवाही कर उनसे कर्मचारियों की वेतन राशि दिलाये जाने की मांग को लेकर माकपा जिला सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी के नेतृत्व में कर्मचारियों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया, जिस पर जिला कलक्टर को कार्यवाही कर धोखाधड़ी के शिकार युवा कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन दिलाने एवं दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करने का विश्वास दिलाया। सिंघवी ने कहा कि सरकार के अधिकांश विभागों में ठेके पर काम करवाया जा रहा है और ये ठेका कम्पनी युवाओं को काम पर नियुक्त करती है लेकिन श्रम कानूनों की पालना नहीं कराई जाती है और कर्मचारियों को उनके काम का बिना भुगतान किये कम्पनी प्रबन्धन रातों रात फरार हो जाते है। इन ठेका कम्पनियों की शिकायत भी की जाती है तो भी उन कर्मचारियों को कोई राहत नहीं मिलती है और उन्हें दर दर की ठोकरे खानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन के नियंत्रण में ये ठेका कम्पनियां नहीं होकर इन ठेका कम्पनियों के नियंत्रण में सरकार और प्रशासन है।

By Udaipurviews

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