जिनवाणी पर श्रद्धा रखें : महासती विजयलक्ष्मी
उदयपुर, 15 जुलाई। श्री हुक्मगच्छीय साधुमार्गी स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान के तत्वावधान में केशवनगर स्थित नवकार भवन में चातुर्मास कर रही महासती विजयलक्ष्मी जी म.सा. ने मंगलवार को धर्मसभा में कहा कि 32 आगमों में से एक भगवती सूत्र में प्रभु ने कहा ‘चलमाणे चलिए’ अर्थात् चले को चला माना जाता है। कोई भी कार्य प्रारंभ कर दिया जाए तो उसे चलमाणे चलिए कहा जाता है। प्रभु महावीर के दामाद अणगार जमाली महावीर की वाणी पर शंका कर दर्शन विराधक बन गये। जमाली मुनि आस्तिक से नास्तिक बन गए जबकि राजा परदेसी एवं गौतम स्वामी नास्तिक से आस्तिक बन गए।…
