रंग बदलती धारा “साहित्यिक कविताओं की उम्दा कृति “
उदयपुर। मानव, प्राकृति, और अध्यात्म के परिवेश और संदर्भों के साथ उदयपुर की रचनाकार सुलेखा श्रीवास्तव का काव्य संग्रह “रंग बदलती धारा “ एक ऐसी कृति है जिसमें जीवन के रंगों और भावों के स्पंदन का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। प्रकृति का लावण्य है तो पर्यावरण असंतुलन और प्रकृति के विनाश का रुदन भी है। पीड़ित मानवता का दर्द भी सृजन में बोलता है। प्राकृतिक प्रकोप चाहे वह केदारनाथ की दुखांतिका हो या हो बाढ़ पीड़ित सबकी व्यथा उजागर होती दिखाई देती है। इनका सृजन छंद मुक्त और भाषा शैली साहित्यिक है। मन के भावों को बहुत ही…
