उदयपुर, 09 अक्टूबर।
“राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥”
“सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥”
प्रभु श्रीराम के दरबार के अनन्य रक्षक और भक्तों के संबल परमवीर हनुमान के पावन आह्वान तथा स्तुति के साथ शौर्य की धरा उदयपुर में मर्यादा पुरुषोत्तम की पावन लीलाओं का महाअनुष्ठान प्रारंभ हुआ। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा की सिद्ध चौपाइयों की पावन गूंज, गुरु वंदना के श्लोकों और भगवान लक्ष्मीनारायण की अलौकिक आरती के साथ दस दिवसीय भव्य श्रीरामलीला का शुभारंभ हुआ।
श्रोताओं और श्रद्धालुओं के कण्ठों से फूटते ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ के गगनभेदी जयकारों के बीच पूरा प्रांगण आध्यात्मिक चेतना और भक्ति के रस में सराबोर हो उठा। अतिथियों एवं समाजजनों ने दीप प्रज्वलन और महाआरती कर राम चरित्र मंचन के इस पावन अनुष्ठान का श्रीगणेश किया।
श्री राम लीला समिति समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने श्रीरामलीला के शुभारंभ पर भक्ति भाव को रेखांकित करते हुए कहा कि श्रीराम की कृपा और भक्ति पाने का एकमात्र द्वार संकटमोचन हनुमानजी की शरण है। जब राम-द्वार पर हनुमानजी का संबल और आज्ञा मिलती है, तो भक्त के सभी भव-बंधन और संताप स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।
इसी पावन भाव के साथ उदयपुर के सांस्कृतिक एवं धार्मिक इतिहास में पहली बार इतने विशाल और दिव्य स्तर पर दस दिवसीय रामलीला आयोजित की जा रही है। इसमें वृंदावन के ‘पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान’ के 40 से अधिक वरिष्ठ व सिद्ध कलाकारों का दल प्रभु श्रीराम की जीवन गाथा को जीवंत करेंगे।
आरम्भ में उपस्थित आगन्तुकों का स्वागत करते हुए महासचिव भंवर लाल शर्मा ने दस दिवसीय आयोजनों की जानकारी दी।
भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने सजीव किया प्रसंगों को
-प्रथम दिन के मंचन में कलाकारों ने ‘नारद मोह’, ‘प्रभु का अवतार प्रयोजन’ और ‘रामलीला की पृष्ठभूमि’ के प्रसंगों का अत्यंत सजीव व भावपूर्ण मंचन किया। जब नारदजी के मोहभंग और अहंकार के शमन की लीला प्रस्तुत की गई, तो दर्शक भाव-विभोर हो उठे।
महंत रास बिहारी सहित अतिथियों ने की प्रभु की आरती--समिति के महासचिव भंवरलाल शर्मा ने बताया कि अस्थल आश्रम के महंत रास बिहारी शरण के सान्निध्य में शुभारंभ अवसर पर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, महापौर पारस सिंघवी, उप महापौर दिनेश भट्ट, शहीद मुस्तफा की माताजी श्रीमती फातिमा बोहरा, पिताजी जकीउद्दीन बोहरा, विप्र फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधेश्याम सिखवाल, समाजसेवी मनोहर सुखवाल, परस राम सूयल, आलोक संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत, चंपालाल धर्मशाला के निदेशक गिरीश माहेश्वरी, लंदन से पधारे बजरंग सिंह राठौड़ ने महाआरती की।
अतिथियों का स्वागत-समिति के समन्वयक अशोक बाबेल, पूर्व पार्षद दिनेश गुप्ता, पूर्व पार्षद श्रीमती दुर्गेश चौबीसा, युवा समाजसेवी विक्रम मेनारिया, दीपक डांगी, प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा, मगन जोशी आदि ने किया।
आज होगा रावण की कठोर तपस्या और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का प्राकट्य-—श्रीराम लीला समिति के संयोजक डॉ. विजयप्रकाश विप्लवी ने बताया कि वृंदावन के प्रसिद्ध संस्थान के अध्यक्ष वेदप्रकाश भारद्वाज, दल प्रमुख घनश्याम शर्मा के कुशल नेतृत्व में 40 अनुभवी कलाकारों का दल रामकथा का मंचन कर रहा है। रामलीला के दूसरे दिन यानी 10 अक्टूबर को रावण की प्रचंड तपस्या, पृथ्वी की करुण पुकार और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अवतार (राम जन्म) के दिव्य प्रसंगों का मनमोहक मंचन किया जाएगा। आयोजन को लेकर शहरभर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और भक्तिमय माहौल बना हुआ है।
