दो दिवसीय साहित्य समागम ‘‘संगमन’’ का उद्घाटन
साहित्य मनुष्य की सर्जनात्मक चेतना का विकास केंद्रः प्रोफेसर नंद किशोर आचार्य सृजनात्मकता के क्षितिज विषयक विभिन्न सत्रों का आयोजन चित्तौड़गढ़ 12 नवम्बर। साहित्य एवं कलाओं की सार्थकता तभी हैं जब वे मनुष्य की सर्जनात्मक चेतना के विकास मे सहभागी हो सके। ये मानव स्वभाव के सृजन की प्रकिया है। साहित्य समागम संगमन के उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आलोचक और केंद्रीय हिंदी साहित्य अकादमी से पुरस्कृत चौथे तार सप्तक के प्रसिद्ध कवि आलोचक नन्द किशोर आचार्य ने सृजनात्मकता के क्षितिज विषयक संगमन का विषय प्रवर्तन किया। प्रोफेसर आचार्य ने अमेरिका और इंग्लैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वतंत्रता को…
