वागड़ अंचल का मनमोहना गैर नृत्य
....यहां होली की मस्ती में माह भर नाचते हैं ग्रामीण ’’ -श्रीमती भावना शर्मा पतझड़ के विषाद के बाद प्रकृति में बासंती उल्लास के साथ ही मानव मन को सुकून देने के लिए होली जैसा रंगों का मनमौजी त्यौहार आता है । सामाजिक रीतिरिवाजों के साथ आनन्दाभिव्यक्ति के लोकेात्सव होली पर यो तो सर्वत्रा मूल भावना एक ही होती हैं तथापि राजस्थान के दक्षिणी भाग में अरावली के अन्तिम छोर पर माही नदी के तट पर अवस्थित वागड़ में होली पर्व पर आयोजित होने वाली विविध विमोहिनी मनोरंजक परम्पराओं के कारण इस पर्व को कुछ भिन्नता ही प्राप्त हुई…
