उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में चल रहे पर्यूषण महापर्व के अंतर्गत धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. राजेन्द्र मुनि ने जीवन में दृष्टिकोण के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर मनुष्य में अच्छी और बुरी दोनों आदतें कम या ज्यादा मात्रा में होती हैं, असली अंतर व्यक्ति की दृष्टि का होता है।
मुनि श्री ने कहा कि सज्जन व्यक्ति को हर तरफ सज्जनता और दुर्जन को संसार में केवल दुर्जनता ही दिखाई देती है। इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने महात्मा बुद्ध का प्रसंग सुनाया। उन्होंने आगे कहा कि दोष दृष्टि रखने वाले को केवल अवगुण और दुर्जनता दिखाई देती है, जबकि गुण दृष्टि रखने वाले को हर स्थिति में अच्छाई और गुण ही नजर आते हैं।
पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर भव्य धर्मसभा एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन उत्साहपूर्वक शुरू हुआ। धर्मसभा में वक्ताओं ने वाणी और दृष्टि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोयल अपनी मधुर वाणी के कारण सर्वत्र मान-सम्मान पाती है, जबकि कौआ अपनी कर्कश वाणी के कारण अनादर का पात्र बनकर उड़ा दिया जाता है। नीतिकारों के अनुसार यथा दृष्टि तथा सृष्टि जैसी नजर होती है, वैसा ही नजरिया बन जाता है। आगम के अनुसार सम्यकदृष्टि सर्वत्र धार्मिकता ग्रहण करता है, जबकि इसके विपरीत मिथ्यादृष्टि धर्म में भी अधर्म का सेवन करता है।
पर्व के उपलक्ष्य में महिला व श्राविका संघ तथा सोहन कुंवर महिला मंडल द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक व धार्मिक प्रस्तुतियां दी गईं। साथ ही अनेक विचारकों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
17 सितम्बर से प्रारंभ होने वाली कल्पवृक्ष समान भक्तामर साधना के उद्घाटन का लाभ समाजसेवी धर्मेश एवं शैलेष नवलखा परिवार ने प्राप्त किया। इस हेतु नवलखा परिवार द्वारा समाज को बड़ी धनराशि समर्पित की गई।
समारोह के दौरान समाज के रोशनलाल जैन, दिनेश चोरड़िया, दिनेश हिंगड़, भंवर सेठ, हिम्मत मेहता, रमेश खोखावत, गणेशलाल गोखरू आदि गणमान्य लोगों ने नौलखा परिवार का स्वागत-अभिनंदन किया। कार्यक्रम के अंत में मंत्री हिम्मत बड़ाला ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया, वहीं उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि ने मंगल भाव व्यक्त किए।
दोष दृष्टि का त्याग कर गुण दृष्टि को अपनाएंःडॉ. राजेन्द्र मुनि
