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उदयपुर। मांडवा पीएचसी में 18 वर्षीय युवती की मौत के बाद मामला तूल पकड़ गया। दूसरे दिन शनिवार को मृतका के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण कोटड़ा सीएचसी के बाहर धरने पर बैठ गए और मुआवजे के साथ सरकारी नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। करीब आठ घंटे चली समझाइश और वार्ता के बाद मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम, नर्सिंगकर्मी के खिलाफ मामला दर्ज करने और 5 लाख रुपए के मुआवजे पर सहमति बनी। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। शुक्रवार दोपहर 18 वर्षीय आरती कुमारी को खांसी-जुकाम की शिकायत होने पर मांडवा पीएचसी ले जाया गया था। आरोप है कि वहां मौजूद जीएनएम ने बिना डॉक्टर की मौजूदगी के युवती को इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनटों बाद आरती की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। मृतका के पिता ने जीएनएम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि न तो पर्ची बनाई गई और न ही युवती की कोई जांच की गई। सीधे इंजेक्शन लगाने की लापरवाही ही उसकी मौत का कारण बनी। घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। शनिवार सुबह 10 बजे से बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन कोटड़ा सीएचसी के बाहर धरने पर बैठ गए। मृतका का शव सीएचसी की मॉर्च्युरी में रखा गया था। परिजन मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक प्रशासन ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक पोस्टमार्टम नहीं कराया जाएगा। तहसीलदार, बीएमओ और पुलिस अधिकारियों ने लगातार समझाइश की। कई दौर की वार्ता के बाद शाम करीब 6 बजे सहमति बनी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया। नर्सिंगकर्मी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा और मृतका के परिजनों को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया।
मांडवा पीएचसी में युवती की मौत पर बवाल, 5 लाख मुआवजे और केस पर बनी सहमति
