उदयपुर। रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. कुशल गहलोत द्वारा किए गए सीटी स्कैन में पता चला कि 4 सेमी मोटा पाइप पसलियां तोड़ते हुए फेफड़े को चीरकर गर्दन तक पहुंच गया था। इससे सबक्लेवियन धमनी और शिरा भी क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे फेफड़ों में भारी रक्तस्राव (हीमोथोरेक्स) हो गया था। कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. विनय नैथानी के नेतृत्व में टीम ने तत्काल ऑपरेशन शुरू किया। सावधानीपूर्वक सर्जरी कर एल आकार के पाइप को शरीर से निकाला गया। इसके बाद क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं की मरम्मत (वैस्कुलर रिपेयर), फेफड़े का उपचार और टूटी पसलियों का पुनर्निर्माण किया गया।
एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. उदिता नैथानी और डॉ. महेश सोमानी ने मरीज की नाजुक स्थिति में सुरक्षित एनेस्थीसिया दिया। सर्जिकल टीम में डॉ. गिरीश, डॉ. ज्योतिद्रों और नर्सिंग अधिकारी संतोष पुरी गोस्वामी सहित ओटी व आईसीयू स्टाफ का अहम योगदान रहा। सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति अब स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है। वह सामान्य आहार भी लेने लगा है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राहुल जैन ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के ‘इम्पेलमेंट इंजरी’ मामलों में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है, लेकिन समय पर सही निर्णय और टीमवर्क से एक जीवन बचाया जा सका। चिकित्सकों ने बताया कि ऐसे हादसों में घाव पर दबाव डालना मददगार हो सकता है, लेकिन शरीर में घुसी वस्तु को कभी भी खुद निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
सीटी स्कैन में सामने आई गंभीरता
