उदयपुर। राष्ट्र संत उपसर्ग विजेता गुरु माँ गणिनि आर्यिका 105श्री सुप्रकाश मति माताजी का 43वां दिक्षा दिवस 14 जनवरी को ध्यानोदय तीर्थ पर. मनाया जायगा।
सुप्रकाश ज्योति मंच के राष्ट्रीय संयोजक ओमप्रकाश गोदावत ने बताया कि सुप्रकाशमति माताजी 42 वर्ष पूर्व मुंबई पोदनपुर त्रिमूर्ति पर आचार्य 108अभिनन्दन सागर एवं मुनि श्री दया सागर के कर कमलो से दीक्षित हुई। 13वर्ष की बालिका सुशीला को उस समय आर्यिका सुप्रकाशमति नाम दिया गया। माताजी ने धर्म के मार्ग पर चलते हुई सम्पूर्ण भारत वर्ष की करीब 75000हजार किलोमीटर की पद यात्रा कर जैन धर्म को प्रचार कर रही है। 14जनवरी को प्रातः 8बजे विशेष प्रभु कामधेनु शांतिनाथ पर कई प्रकार के रसों एवं अमृत के अभिषेक से दीक्षा महोत्सव का शुभारम्भ होगा। उसके बाद शांति विधान विश्व शांति हेतु एवं गुरु माँ को ज्ञान शास्त्र के रूप मे 43शास्त्र भेट किये जायगे।
गुरु माँ वर्तमान में ध्यानोदय तीर्थ पर है जहाँ इस आयोजन को सानिध्य प्रदान करने.मुनि श्री 108आर्ष कीर्ति महाराज सेक्टर 4से विहार कर 13 जनवरी को सांय 5बजे मंगल प्रवेश करगे। जहाँ गणिनि प्रज्ञामति एवं 8आर्यिका इस आयोजन मे आशीर्वाद प्रदान करेंगे। सम्पूर्ण उदयपुर समाज इस दीक्षा महोत्सव को तैयारी मे लगा है।
गुरु माँ ने आज प्रवचन मे कहा कि गुरु ही होता है जो शिष्य को परख कर किसी भी मार्ग पर आगे बढ़ा सकता ह और मेरे गुरु मे मुझे बिना किसी लौकिक ज्ञान के मुझे सब ज्ञान प्रदान किया और आज जब किसी भी भाषा को मुझे पढ़ने बोलने मे तकलीफ नहीं तो उसका कारण केवल गुरु का आशीर्वाद ह। इस आयोजन मंे अध्य्क्ष सुमति लाल ने बताया कि समारोह में कई गणमान्य नगारिक भाग लेंगे। शास्त्र भेट मंे महिला मंच तैयारी कर रहे है। पवन जावरिया ने बताया कि कुछ विशिष्ट सेवा के लिए सम्मान किये जायगे। इस आयोजन के लिए ब्रज लाल खलुडिया अपनी पूरी समाज के साथ आमंत्रित करने मे लगे हुए है।
सुप्रकाशमति माताजी का 43वां दीक्षा दिवस कल
