ज्ञान के भंडार थे आचार्य देवेन्द्र मुनि

उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज के सानिध्य में आचार्य सम्राट श्री देवेंद्र मुनि महाराज की 92 वीं जन्म जयंती मनाई गई।
इस दौरान मुनि अमृत मुनि जी महाराज एवं डॉ वरुण मुनि ने आचार्य आचार्य सम्राट देवेंद्र मुनि जी की जन्म जयंती पर उनका गुणगान करते हुए कहा कि वह श्रमण संघ के ऐसे महान आचार्य थे जिनका जन्म उदयपुर की धरती पर हुआ था। यह उदयपुर वालों के लिए बहुत ही गर्व और गौरव की बात है। उदयपुर में उनका जन्म हुआ था और उनकी जन्म यात्रा उदयपुर से प्रारंभ हुई थी, लेकिन उनका पुनर्जन्म मारवाड़ में हुआ जब उनकी दीक्षा हुई थी। हालाकि उनका आयुष लंबा नहीं चला था। और 68 वर्ष की अल्प आयु में ही उनका देव लोग गमन हो गया। उनकी धाम यात्रा मारवाड़ की धरती से शुरू हुई जबकि उनके जीवन का अंतिम समय मुंबई में व्यतीत हुआ।  आचार्य सम्राट देवेंद्र मुनि का जीवन हमेशा से ही प्रेरणादाई रहा है और प्रेरणादायक रहेगा।
डॉ वरुण मुनि जी ने आचार्य सम्राट देवेंद्र मुनि जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह एक महान आचार्य सम्राट के साथ ही महान लेखक और गजब के साहित्यकार थे। उन्होंने अल्पायू में ही ऐसे ऐसे गंभीर विषयों पर साहित्य की रचना की जो आज के समय की जरूरत है। उनमें अथाह ज्ञान था ,वे ज्ञान के भंडार थे। उनकी जरूरत आज भी है। अगर वह आज होते तो उनके ज्ञान से हम और भी ज्यादा लाभान्वित होते।
मंत्री दिनेश हिंगड़ ने बताया कि इस अवसर पर श्रावक संघ की और से अध्यक्ष एडवोकेट सुरेश नागौरी,महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन एवं ओंकार सिरोया सहित श्राविका संघ की ओर से भी आचार्य सम्राट देवेंद्र मुनि जी का गुणगान किया गया एवं उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

By Udaipurviews

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