– साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की
– आयड़ जैन तीर्थ में अनवरत बह रही धर्म ज्ञान की गंगा
उदयपुर 4 नवम्बर। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में शनिवार को विशेष पूजा-अर्चना के साथ विविधि अनुष्ठान हुए। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में आरती, मंगल दीपक, सुबह सर्व औषधी से महाअभिषेक एवं अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई। जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा ने परमात्मा की आरती एवं मंगल दीपक के विवेचन करते हुए बताया कि अष्ट प्रकारी जिनपूजा-स्नात्र पूजा आदि पूर्ण होने के पश्चात् आरती व मंगल दीपक किया जाता है। आरति और मंगल दीपक- करने के पूर्व उस पर तिलक करना, मौली बांधनी चाहिए उसके बाद पुष्प, नमक पानी हाथ में लेकर तीन बार कूण (जमक) उतारना चाहिए। बाद में मस्तक पर पगडी या टोपी पहन कर कंधे पर दुपट्टा धारण करके आरति करनी चाहिए (बहन को कंधे पर चुंदडी रखनी चाहिए व सर पर मोडिया रखना चाहिए। आरति करते समय शंखनाद, घंटानाद, धूप, चामर और मधुर काव्यों का गान करना चाहिए, तदुपरान्त इसी तरह से मंगलदीप भी करना चाहिए। आरति / मंगल दीप उतरे उस वक्त दो जन दोनों ओर धूपदान में धूप लेकर खड़े रहे। मंगलदीपक में गुड क्यूर आदि रखे। आरति व मंगल दीप सृष्टिक्रम से अर्थात प्रभु के दाहिने पक्ष से (अपने बाएं हाथ से) ऊपर की ओर ले जाना चाहिए और प्रभु के बाँए पक्ष से नीचे उतारने चाहिए। दूसरे शब्दों में कह सकते है कि घड़ी के काँटाँ की दिशा के अनुसार आरति व मंगल दीप करना चाहिए आरति ढाई वर्तुल में पूरी करनी चाहिए। आरति नाभि से नीचे व नासिका से ऊपर नहीं ले जानी चाहिए।आरति व मंगल दीपक करने के बाद उस पर छिद्रयुक्त ढक्कन (सरपोसा) डाल देना चाहिए. उसे खुला रखना उचित नहीं है एक दिन परमात्मा की आरति करने से हमारे सात भवों मे किये गये पापों का नाश होता है। ऐसा अचूक प्रभाव है। चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।
आरती व मंगल दीपक से करें परमात्मा की पूजा : साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री
