उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की और से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने प्रातकालीन धर्म सभा में कहा कि जो मनुष्य प्रमाद छोड़कर अपने शरीर पर धर्म रूपी कवच धारण कर लेता है उसका जीवन सफल हो जाता है। अप्रमादी व्यक्ति हमेशा स्वस्थ रहता है, ज्ञानवान रहता है। जिसके जीवन में प्रमाद है, जो आलसी है वह व्यक्ति स्वयं अपने जीवन को व्यर्थ कर देता है।
उन्होंने बताया कि दूसरों के जीवन में क्या हो रहा है इस बात की चिंता छोड़कर स्वयं के जीवन के सुधार में लगना चाहिए। नवकार महामंत्र एवं प्रभु महावीर की वाणी सदा शुभ फलदायिनी होती है। जीवन में व्यक्ति को व्यर्थ की भाग दौड़ छोड़ते हुए यह मान लेना चाहिए कि जितना भाग्य में लिखा है उतना ही हमें मिलेगा। जितना मिला है उसमें ही व्यक्ति को संतुष्ट रहना चाहिए। अगर आप जीवन में दान और पुण्य के कार्य नहीं करेंगे और हमेशा धन को संचित ही करते रहेंगे तो कोई भी आपको याद नहीं करेगा। अपना जीवन सफल बनाने और अपने आत्म कल्याण के लिए नवकार महामंत्र की साधना और महावीर की वाणी ही श्रेष्ठ है। जो व्यक्ति प्रमादी बनकर पाप कर्मों से धन कमाता है उसका धन व्यर्थ के कामों में ही जाता है। व्यसन में लग जाता है तो किसी को कोई गंभीर बीमारियां लग जाती है। और उसका कमाया हुआ सारा धन उन्हीं में लग जाता है। इसलिए जीवन में हमेशा पाप कर्मों से दूर रहना चाहिए। क्रोध कषाय मोह माया यह सभी आपके सफल जीवन होने में बाधा पैदा करते हैं इसलिए इनसे हमेशा दूर रहकर पुण्य कर्म करने चाहिए।
डॉ.वरुण मुनि जी ने कहा कि मनुष्य जीवन बहुत ही छोटा सा जीवन है, अगर हम इस जीवन का विशलेषण करें तो यह मात्र 7 दिन का ही जीवन है। उन्होंने ऐसे जीवन की महिमा को समझाते हुए कहा कि सोमवार को हमारा जन्म होता है, मंगलवार को हमें ज्ञान की प्राप्ति होती है, बुधवार को शादी हो जाती है, गुरुवार को बच्चे हो जाते हैं, शुक्रवार को दादा बन जाते हैं, शनिवार को शरीर साथ नहीं देता और गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं और अनायास हम रविवार को याद करने लगते हैं। हे भगवान अब तो मेरे जीवन में रविवार दे दे ताकि मैं इस दुनिया से चला जाऊं यानी कि रविवार को व्यक्ति की मौत निश्चित है। इसलिए हमें जीवन में ज्ञानवान बनकर अपने जीवन को सफल बनाते हुए सद्गति को प्राप्त करने वाली सकल मौत का वरण करना चाहिए।
धर्मसभा में अखिलेश मुनि ने गीतिका प्रस्तुत की। महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास काल से ही णमोकार महामंत्र की धर्म आराधना निरंतर जारी है। शनिवार को बाहर से आए अतिथियों का धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्मसभा में मेवाड़ वागड़ क्षेत्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है।
अप्रमादी व्यक्ति हमेशा स्वस्थ व ज्ञानवान रहताःसुकनमुनि
