जीवन में कर्मो के अनुसार आते है सुख दुख

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें
उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिंधी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनी जी महाराज ने चातुर्मास के अवसर पर प्रातः कालीन धर्म सभा में कहा कि मनुष्य के जीवन में आने वाले हर सुख और दुख उसके कर्मों के फल होते हैं। या यूं कहे की सुख और दुख कर्मों के अधीन होते हैं। जो व्यक्ति जैसा करता है उसे फल भी वैसा ही मिलता है। अगर आपके कर्म पुण्य के अधीन है तो जीवन में हमेशा आपको सुख की प्राप्ति ही होगी। अगर आपके कर्म बुरे कार्यों के अधीन है तो आपको दुख की प्राप्ति होगी। इस जीवन में ना कोई सुख देता है ना कोई दुख देता है। सुख दुख का कारण हम स्वयं ही है। जो व्यक्ति धर्म कार्यौ में, तप आराधना और तपस्या मैं मजबूत होता है वह व्यक्ति ही यह जान पाता है कि सुख-दुख कोई देता नहीं है बल्कि यह अपने कर्मों का फल ही हम भोगते हैं। जीवन में यदि आपके धर्म है तो आपके सारे दुख स्वत ही दूर हो जाएंगे। कर्मफल कई बार आपकी संगत का भी परिणाम होता है। आप जैसी संगति में रहोगे आप पर उसी का प्रभाव पड़ेगा। अच्छी संगति में रहोगे, सत्संग में रहोगे, धर्म ध्यान में रहोगे, गुरु का सानिध्य प्राप्त करोगे तो आपके कर्म भी अच्छे होंगे। आप उनके द्वारा लगातार पुण्य कर्म में बंधते जाओगे। अगर आपकी संगति बुरी है तो आपके कर्मबंध भी बुरे होंगे और दुख को आपके जीवन में आने से कोई नहीं रोक सकता। इसलिए आपके शरीर में जब तक आत्मा विद्यमान है आप पुण्य कर्म और धर्म आराधना के साथ ही आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करो। यह मार्ग महावीर की वाणी से ही मिलता है।
डॉ वरुण मुनि ने कहा कि समय लगातार बदल रहा है। आज परिवार में एक दूसरे से प्रेम नहीं है। भाई को बहन की और बहन को भाई के पवित्र रिश्ते तक की कदर नहीं रही। जैन धर्म में कभी व्यसन नाम की कोई चीज नहीं होती थी लेकिन आज विडंबना देखें कि बड़े-बड़े शहरों में लोग व्यसन कार्यों में लिप्त देखे जा सकते हैं। जहां विकास होता है उसके भविष्य में विनाश जरूर छिपा होता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल को ही ले लीजिए। आज इसका जितना सदुपयोग हो रहा है उसे दुगुना इसका दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है। इसलिए हमें हर वक्त यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि हम हर हाल में धर्म कार्यों से दूर नहीं हो। धर्म कार्य में रहने वाला मनुष्य कभी भी ऐसे को कर्मों की तरफ आकर्षित नहीं हो सकता। इसलिए अभी भी समय है महावीर की वाणी को जीवन में उतारकर, धर्म कार्यों को करके अपने जीवन में पुण्य कर्म का उदय किया जा सकता है। धर्म सभा में अखिलेश मुनि ने सुंदर गीतिका प्रस्तुति की।
महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास काल से ही निरंतर णमोकार महामंत्र की धर्म आराधना चल रही है। उदयपुर में ऐसा पहली बार हुआ है कि इतने बड़े स्तर पर पूरे 5 महीने तक लगातार णमोकार महामंत्र के जाप हो रहे हैं। निश्चित तौर पर इस चातुर्मास में यह जाप अनुष्ठान एक बहुत बड़ा इतिहास रचने जा रहे हैं जिस पर  हम सभी को गर्व है। धर्म सभा में मेवाड़ वागड़  क्षेत्र सहित देश के विभिन्न भागों से श्रावक श्राविकाओ का गुरुदेव से आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचने का क्रम जारी है। मंगलवार को भी कई गुरु भक्त गुरुदेव का आशीर्वाद लेने पहुंचे जिनके धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया।
By Udaipurviews

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