आठवां उदयपुर फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ
उदयपुर। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने कहा कि जोशीमठ की त्रासदी वहां के विकास का अपरिहार्य परिणाम है। पर्यावरणविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओंने दशकों पहले ही चेता दिया था कि अंधाधुंध विकास इस शहर की तबाही का कारण बनेगा और आखिरकार वही हुआ।
वे शनिवार को यहां आइवे उदयपुर फिल्म फेस्टिवेल के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सती ने कहा कि पिछले वर्ष से शहर में दरारें पड़नी शुरू हुईं और अब कई गांव भुतहा गांव में तब्दील हो चुके हैं जहां कोई नहीं रहता। भूगर्भविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार दी जा रही चेतावनियों के बावजूद सरकार ने चौड़े राजमार्ग, भूमिगत सुरंगों और बिजली उत्पादन के महाकाय संयंत्रों के जरिए इस तबाही को आमंत्रित किया। केदारनाथ और बद्रीनाथ में रिवरफ्रÞंट बनाने जैसे उद्यमों को हास्यास्पद बताते हुए उन्होंने कहा कि पूरी देश में विकास का एक मॉडल थोपना मूर्खता ही नहीं तानाशाही है।
हुआ फिल्मों का प्रदर्शन
समारोह की पहली फिल्म मोहम्मद गनी निर्देशित फीचर फिल्म मट्टो की साइकिल दिखाई गई जो हमें इतालवी क्लासिक बाइसिकिल थीफ की याद दिलाती है जिसमें प्रकाश झा के शानदार अभिनय ने एक गरीब मजदूर के दुख को जीवंत कर दिया। सवाल जवाब में निर्देशक मोहम्मद गनी ने कहा कि इस फिल्म का आइडिया उन्हें अपने पिता के जीवन से आया जो खुद एक मजदूर थे। फिल्म की अभिनेत्री अनीता चौधरी ने फिल्म निर्माण के अपने अनुभव साझा किए।
दोपहर का सत्र निमिषा श्रीवास्तव की लघु फिल्म चदरिया से प्रारंभ हुआ जिसमें जबरन गर्भपात से गुजरी लड़कियों के अनुभवों को चाक्षुष और सांगीतिक माध्यम से दर्शाया गया। तीसरी फिल्म अनुरंजन शर्मा की फिल्म डकैत थी जो बांगला लेखक सुकुमार रे की एक यादगार कहानी पर आधारित थी। फिल्म की फोटोग्राफी, ध्वनि प्रभाव और संगीत को दर्शकों की खूब सराहना मिली। शाम के सत्र में फातिमा निजारुद्दीन ने कबीर की कविताओं के माध्यम से सांप्रदायिकता से संघर्ष के प्रोजेक्ट को सामने रखा।
सारे देश में विकास का एक मॉडल थोपना आत्मघाती है-अतुल सती
