आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्रशासन अलर्ट: एविएशन सेफ्टी मॉडल से सुरक्षित होगा मातृ स्वास्थ्य

उदयपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज कोटा में प्रसुताओं की मौत की घटना के बाद रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आया गया। डिजिटल डैशबोर्ड और मॉक ड्रिल पर जोर देते हुए गुरुवार को प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में आपात बैठक बुलाते हुए मातृ मृत्यु रोकने के लिए प्रोएक्टिव रणनीति पर मंथन करने के साथ ही अतिरिक्त प्राचार्य की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई।
बैठक की अध्यक्षता प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन ने की। बैठक के दौरान सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विपिन माथुर ने विस्तृत प्रेजेंटेशन देते हुए बताया कि जिस तरह विमानन उद्योग ने अपनी त्रुटियों से सीखकर सुरक्षा को विश्वस्तरीय बनाया है, उसी एविएशन मॉडल को मातृ स्वास्थ्य में लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्विस चीज़ माॅडल का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रणाली की कई छोटी विफलताएं मिलकर बड़ी दुर्घटना का कारण बनती हैं, जिन्हें बहुस्तरीय सुरक्षा घेरों से रोका जा सकता है। अस्पताल के प्रत्येक विभाग में होने वाली मृत्यु का विस्तृत ऑडिट किया जाएगा। इसकी निगरानी के लिए एक कमेटी गठित होगी। मातृ एवं शिशु की सुरक्षा हेतु मापदंड निर्धारित किए जाएंगे और उसको आम जनता के साथ भी साझा किया जाएगा। अन्य सरकारी महाविद्यालय के विशेषज्ञों से जनाना चिकित्सालय का निरीक्षण कराया जाएगा, ताकि कुछ खामियां हो, तो उसमें सुधार किया जा सकें। इस हेतु एम्स जोधपुर के चिकित्सकों को बुला कर जनाना चिकित्सालय का निरीक्षण कराने का प्रयास करेंगे। आपातकालीन स्थितियों (जैसे कोड ब्लू, ऑब्सटेट्रिक हेमरेज) के लिए सभी विभागों में नियमित मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। संक्रमण दर और प्रोटोकॉल पालन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल डैशबोर्ड स्थापित किए जाने की आवश्यकता का सुझाव दिया गया। सभी आईसीयू में तत्काल जांच हेतु पॉइंट ऑफ केयर (एबीजी, लेक्टेट टेस्ट, ईसीजी, इको व यूएसजी) की बेडसाइड सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। पन्नाधाय महिला चिकित्सालय (जनाना) में मरीजों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए ओपीडी काउंटर की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए। अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. विजय गुप्ता की अध्यक्षता में एक पांच सदस्यीय कमेटी बनेगी जिसके संयोजक अधीक्षक डॉ आर एल सुमन होंगे, जो समस्त आईसीयु, लेबर रूम, आॅपरेशन थिएटर, वार्ड का निरीक्षण कर सुधार हेतु अपने सुझाव दो दिन में प्रस्तुत करेंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटना ना हो। प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डाॅ राहुल जैन ने कहा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज कोटा जैसी घटना की पुनरावृत्ति इस संस्थान में न हो, इसके लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। अब व्यक्तिगत वीरता के बजाय सुरक्षित सिस्टम पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। हमने दोषारोपण की संस्कृति को छोड़कर सीखने की संस्कृति अपनाने का निर्णय लिया है। हर एक नियर-मिस घटना की रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी ताकि बड़ी आपदा को पहले ही टाला जा सके। हमें चिकित्सा में पदानुक्रम की बाधाओं को तोड़ना होगा। नर्सों और जूनियर डॉक्टरों को सशक्त बनाया जाएगा कि वे किसी भी सुरक्षा चूक को बिना किसी डर के तुरंत रिपोर्ट कर सकें। मातृ मृत्यु की समीक्षा अब केवल औपचारिक न होकर रूट कॉज एनालिसिस पर आधारित होगी। बैठक में अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. विजय गुप्ता, महाराणा भूपाल अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.एल. सुमन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ संगीता सेन सहित समस्त विभागों के विभागाध्यक्षों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

By Udaipurviews

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