उदयपुर, 06 अक्टूबर 2026 महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के अखिल भारतीय समन्वित मक्का अनुसंधान परियोजना के तत्वावधान में केड़ारिया गाँव में मक्का की अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन एवं फील्ड डे आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों के खेत पर पहुंचकर मक्का की उन्नत किस्मों एवं आधुनिक उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी तथा किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया।
कार्यक्रम में आईसीएआर-भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना के डॉ. प्रदीप कुमार, शीतकालीन नर्सरी केंद्र, हैदराबाद के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुनील नीलम, महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी के पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. विवेक शिवाजी राव शिंदे, आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश की शस्य वैज्ञानिक डॉ. वी. सुजाता तथा मक्का अनुसंधान इकाई, हैदराबाद की कीट वैज्ञानिक डॉ. अनुषा ने किसानों को मक्का की उन्नत एवं वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी।
डॉ. अमित दाधीच, परियोजना प्रभारी, एमपीयूएटी ने कहा कि किसानों के खेत पर तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन नई तकनीकों के प्रति उनका विश्वास बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का आह्वान किया।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुनील नीलम ने गुणवत्तापूर्ण बीज एवं क्षेत्र के अनुकूल किस्म के चयन को मक्का उत्पादन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
डॉ. प्रदीप कुमार, आईसीएआर-भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना ने कहा कि आधुनिक तकनीकों से उत्पादन बढ़ाने के साथ उत्पादन लागत कम करना किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने संतुलित पोषण, सिंचाई तथा रोग एवं कीट प्रबंधन पर विशेष जोर दिया।
डॉ. विवेक शिवाजी राव शिंदे ने मक्का में रोगों की समय पर पहचान एवं समेकित रोग प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।
इस अवसर पर महाराज रणधीर सिंह (भिंडर नरेश), पूर्व विधायक, वल्लभनगर ने किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि किसानों तक विज्ञान तभी सही मायने में पहुंचता है, जब उसका लाभ खेत में दिखाई दे।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. हरीश कुमार सुमेरिया, श्री राम नारायण कुम्हार, डॉ. एन.के. पाडीवाल एवं डॉ. अमित दाधीच द्वारा किसानों को अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के अंतर्गत उन्नत बीज एवं प्रदर्शन सामग्री का वितरण किया गया। किसानों ने वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं साझा कीं और समाधान प्राप्त किए। कार्यक्रम से वैज्ञानिकों और किसानों के बीच खेत स्तर पर सीधा संवाद और जुड़ाव मजबूत हुआ।
