पंचामृत महाभिषेक, दशलक्षण आराधना और भव्य भक्ति संध्या से सजेगा महापर्व
गुरु मां 105 सुप्रकाश मति माताजी ने किया आमंत्रण पत्रिका का विमोचन
उदयपुर। ध्यानोदय तीर्थ क्षेत्र श्री सुप्रकाश मति ध्यान केन्द्र, बलीचा में पर्वराज पर्यूषण महापर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। युग साधिका गणिनी प्रमुख 105 श्री ज्ञानमति माताजी, अयोध्या एवं तीर्थ शिरोमणि गुरु मां 105 गणिनी आर्यिका श्री सुप्रकाश मति माताजी के मंगल निर्देशानुसार इस वर्ष 11 दिवसीय दशलक्षण महापर्व का आयोजन 15 से 25 सितंबर तक भव्य धार्मिक आयोजनों के साथ होगा। रविवार को विशेष अभिषेक के अवसर पर गुरु मां ने मेघानी नगर, अहमदाबाद से लाइव आमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया।
महामंत्री अरविन्द पाडलिया ने बताया कि 15 सितंबर को प्रातः मूलनायक श्री 1008 शांतिनाथ भगवान का भव्य पंचामृत महाभिषेक किया जाएगा। प्रथम स्वर्ण कलश से जलाभिषेक के साथ इक्षु रस, नारियल रस, गिर गाय के शुद्ध दूध, दही, सर्व औषधि, चंदन-केसर धारा, पुष्प वर्षा एवं मंगल आरती सहित विविध धार्मिक अनुष्ठान होंगे। विश्व शांति की कामना से रजत कलशों द्वारा महा-शांति धारा भी की जाएगी।
संयोजक दिलीप गोदावत ने बताया कि जिन-धर्म ध्वजा एवं दिव्य केसरिया ध्वज के ध्वजारोहण के साथ पर्वराज का विधिवत आगाज होगा। ध्वजारोहण का पुण्य लाभ श्री लक्ष्मी लाल-प्रशांत मालवी परिवार को तथा सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य श्री रवि-सोनू जी जोलावत, सवीना, उदयपुर को प्राप्त हुआ है।
चेयरमैन ओम गोदावत ने बताया कि महापर्व के दौरान विशेष विधान, पूजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। दीपक जैन, अनिल दोशी, दिलीप गोदावत, विक्रम चावड़िया, गणेश देवड़ा, सतीश बाकलीवाल, सुनील जैन साबला, उमेश जावरिया, निर्मल गांधी, आशा कंठालिया, ममता रजावत, मोनिका गोदावत एवं साधना कंठालिया सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं धार्मिक आयोजनों में सहभागिता निभा रहे हैं।
भोजन व्यवस्थापक विनोद कीकावत ने बताया कि सभी इंद्र-इंद्राणी 11 दिनों तक शुद्ध भोजन ग्रहण करेंगे तथा बाहरी भोजन का त्याग रहेगा। आरती संयोजक दीपक जैन एवं उमेश नफावत ने बताया कि 21 सितंबर को सुगंध दशमी के अवसर पर विशेष गायकों के मधुर स्वरों में भव्य भक्ति संध्या आयोजित होगी।
आमंत्रण पत्रिका विमोचन के अवसर पर गुरु मां 105 श्री सुप्रकाश मति माताजी ने कहा कि दिगंबर जैन परंपरा में पर्यूषण को पर्वराज कहा जाता है। दशलक्षण पर्व आत्मा के दस पवित्र गुणोंकृउत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव आदिकृकी आराधना का अवसर है। यह पर्व आत्मशुद्धि, कर्मों के बंधनों से मुक्ति और आत्मनिरीक्षण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ आत्मा का स्वभाव नहीं, बल्कि विभाव हैं। दशलक्षण धर्मों की आराधना से आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट होती है। सह-संयोजक विपिन जैन ने समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं से ध्यानोदय तीर्थ बलीचा पधारकर धार्मिक आयोजनों में सहभागिता निभाने एवं पुण्य लाभ लेने का आह्वान किया है।
ध्यानोदय तीर्थ बलीचा में 11 दिवसीय पर्वराज पर्यूषण महापर्व की तैयारियां शुरू
