देवेंद्र धाम में महावीर जन्मोत्सव पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हजारों महिलाओं ने लिया चूँदड़ी उपवास का संकल्प
उदयपुर, 11 सितंबर। देवेंद्र धाम स्थित महावीर समवशरण में भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि भगवान महावीर को केवल मानना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके सिद्धांतों को जीवन में उतारना आवश्यक है। यदि प्रत्येक व्यक्ति महावीर की शिक्षाओं को आचरण में लाए तो समाज में शांति, सद्भाव और समरसता स्थापित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परिवार से लेकर समाज और राष्ट्र तक आपसी वैमनस्य एवं दूरियां बढ़ रही हैं। इसका समाधान दूसरों को बदलने में नहीं, बल्कि स्वयं में सुधार करने में है। व्यक्ति के भीतर परिवर्तन आएगा तो परिवार, समाज और राष्ट्र में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।
भगवान महावीर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मुनि ने कहा कि उन्होंने जीवन में आई कठिनाइयों और प्रतिकूल परिस्थितियों को पूर्ण समभाव के साथ सहन किया। उनकी असीम आंतरिक शक्ति, कठोर तप और साधना ने उन्हें ‘महावीर’ बनाया।
प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि भगवान महावीर के जन्म के साथ ही चारों ओर सुख-समृद्धि का वातावरण बना, इसलिए उनका नाम ‘वर्धमान’ पड़ा। वे महाज्ञानी, महातपस्वी और महामुनिराज थे। उनका जीवन आज भी सत्य, अहिंसा, क्षमा, संयम और करुणा का मार्ग दिखाता है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि भगवान महावीर ने साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका के रूप में चतुर्विध संघ की स्थापना की। उन्होंने समस्त जीवों के प्रति दया, अहिंसा, शाकाहार और मानव सेवा का संदेश दिया।
महावीर जन्मोत्सव पर श्राविका संघ की ओर से भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों पर आधारित आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई। इसे श्रद्धालुओं ने खूब सराहा। धर्म प्रभावना के इस अवसर पर हजारों महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक ‘चूँदड़ी उपवास’ का नियम अंगीकार किया।
कार्यक्रम में प्रमुख समाजसेवियों की सेवाओं की संघ की ओर से भूरी-भूरी अनुमोदना की गई। समापन पर उपाध्याय रमेश मुनि के शिष्य दीपेश मुनि ने मंगल भावना प्रस्तुत कर सभी को आशीर्वाद दिया। अंत में आयोजकों, मुनिवृंद एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारें, तभी बनेगा शांत और समरस समाजःडॉ. सुरेंद्र मुनि
