महाप्रज्ञ विहार में धर्मसभा, बोले मुनिश्री-पहले दो बार सोचें, फिर एक बार बोलें’
उदयपुर। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज के आठ दिवसीय पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के चौथे दिन वाणी संयम दिवस मनाया गया। महाप्रज्ञ विहार में युगप्रधान आचाय महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती मुनि संजय कुमार दिवेर, मुनि प्रकाश कुमार दिवेर एवं मुनि सिद्धि प्रज्ञजी उज्जैन के सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि संजय कुमार ने कहा कि वाणी मनुष्य के व्यक्तित्व, संस्कार और व्यवहार की पहचान होती है। शरीर की सुंदरता से अधिक महत्वपूर्ण वाणी की मधुरता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को यह विवेक रखना चाहिए कि कब, कहां, कितना और किसके सामने बोलना है तथा कब मौन रहना है।
उन्होंने कहा कि बोलना एक कला है और सुनना भी एक कला है, लेकिन वाणी पर संयम रखना सबसे कठिन साधना है। बिना सोचे-समझे या क्रोध और आवेश में बोले गए शब्द रिश्तों में दरार पैदा कर सकते हैं। इसलिए बोलने से पहले दो बार विचार करना चाहिए और उसके बाद ही एक बार बोलना चाहिए।
उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी को छानकर ग्रहण किया जाता है, उसी प्रकार वाणी को भी विचारों की छलनी से छानकर बोलना चाहिए। वाणी में मिठास, मधुरता और संयम होना चाहिए। जहां बोलना जरूरी हो वहां स्पष्टता से बोलें और जहां मौन अधिक प्रभावी हो, वहां मौन रहना ही श्रेष्ठ है।
मुनिश्री ने कहा कि कई बार मौन ऐसी परिस्थितियों को शांत कर देता है, जिन्हें अधिक बोलकर और बिगाड़ दिया जाता है। इसलिए जीवन में वाणी के उचित प्रयोग का विवेक विकसित करना आवश्यक है।
धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने मधुर वाणी, संयमित व्यवहार और सोच-समझकर बोलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल की सदस्याओं द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद सामयिक की महिमा पर आधारित सुंदर गीतिका प्रस्तुत की गई। तेरापंथ सभा उदयपुर के अध्यक्ष राजकुमार कच्छारा और मंत्री राकेश नाहर ने बताया कि शनिवार 12 सितम्बर को व्रत चेतना दिवस के रूप में मनाया जायेगा।
