सांवरिया सेठ’ की सफलता से राजस्थानी सिनेमा को नई उड़ान

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। राजस्थानी फिल्म ‘सांवरिया सेठ’ को मिल रही दर्शकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया ने एक बार फिर यह साबित किया है कि अगर अपनी भाषा, संस्कृति और मिट्टी से जुड़ी कहानी को बेहतर मनोरंजन के साथ दर्शकों के सामने रखा जाए तो राजस्थानी सिनेमा के लिए दर्शकों की कमी नहीं है। मायड़ व्ज्ज् पर रिलीज के महज 72 घंटे में फिल्म के 6 हजार से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। राजस्थानभर से दर्शक फिल्म की सराहना कर रहे हैं और बड़ी संख्या में फोन व संदेशों के माध्यम से टीम तक अपनी प्रतिक्रियाएं पहुंचा रहे हैं।
भक्ति, हास्य, पारिवारिक भावनाओं और राजस्थानी संस्कृति के मेल वाली इस फिल्म को दर्शक परिवार के साथ देखने लायक बता रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि फिल्म में मनोरंजन के साथ अपनी भाषा, संस्कार और संस्कृति की झलक उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ती है। यही वजह है कि फिल्म को लेकर युवा वर्ग से लेकर परिवार और बुजुर्ग दर्शकों तक उत्साह देखने को मिल रहा है।
फिल्म की सफलता को राजस्थानी सिनेमा में बदलते दर्शक रुझान के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब दर्शक केवल बड़े बजट या दूसरी भाषाओं के सिनेमा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी मायड़ भाषा में बनी अच्छी कहानी और गुणवत्तापूर्ण मनोरंजन को भी पसंद कर रहे हैं। ऐसे में ‘सांवरिया सेठ’ जैसी फिल्में राजस्थानी भाषा और सिनेमा को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
फिल्म के लेखक-निर्देशक डी. पी. सिंह बासनी का कहना है कि दर्शकों का यह प्रेम पूरी टीम के लिए प्रेरणा है। उन्होंने बताया कि हजारों कॉल और संदेश लगातार मिल रहे हैं और दर्शकों की मांग को देखते हुए ‘सांवरिया सेठ 2’ को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। फिल्म की शूटिंग करीब 90 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और जल्द ही दूसरे भाग को दर्शकों के सामने लाने की तैयारी है।
बासनी के अनुसार, “राजस्थानी भाषा और संस्कृति को केवल यादों तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उसे आधुनिक सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। दर्शक अपनी भाषा में अच्छी कहानी देखना चाहते हैं और ‘सांवरिया सेठ’ को मिला प्रेम इसी बदलाव का संकेत है।”
‘सांवरिया सेठ’ की सफलता ऐसे समय में सामने आई है, जब राजस्थानी भाषा और संस्कृति को केंद्र में रखकर नए सिनेमा और डिजिटल कंटेंट के लिए माहौल बन रहा है। मायड़ व्ज्ज् भी राजस्थानी भाषा, संस्कृति और स्थानीय कहानियों को मंच देने की दिशा में काम कर रहा है।

By Udaipurviews

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