कॉर्निया ट्रांसप्लांट में अलख नयन मंदिर नेत्र संस्थान ने रचा नया मुकाम
748 कॉर्निया प्रत्यारोपण से मरीजों की आंखों में लौटी रोशनी, नेत्रदान को जनआंदोलन बनाने की पहल
सीएमई एवं लघु कॉन्फ्रेंस में कॉर्निया प्रत्यारोपण और नेत्रदान पर आज होगा मंथन
उदयपुर, 7 सितंबर। दक्षिण राजस्थान में आधुनिक नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में कार्यरत अलख नयन मंदिर नेत्र संस्थान ने कॉर्निया प्रत्यारोपण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में अब तक 748 कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। डीएएलके, डीएसईके और डीएमईके जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कॉर्निया रोग से प्रभावित मरीजों को दृष्टि बहाली का लाभ मिला है।
संस्थान के मेडिकल डायरेक्टर डॉ.एल.एस.झाला ने बताया कि देश में नेत्रदान के प्रति जागरूकता की कमी के चलते वर्तमान में करीब 11 लाख लोग कोर्निया के कारण अंधता के शिकार है जिन्हें आज भी रोशनी का इंतजार है। एक कोर्नियंा दान से दो आखों को रोशनी मिल सकती है। अलख नयन मंदिर संस्थान दक्षिणी राजस्थान का एक मात्र ऐसा संस्थान है जहंा कोर्निया सर्जरी के विशेषज्ञ अपनी सेवायें दे रहे है।
उन्होंने बताया कि देश में प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ मृत्यु होती है लेकिन उसकी तुलना में बहुत कम कोर्निंया मिल पाता है जिस कारण अंधता के शिकार लोगों को रोशनी नहीं मिल पा रही है। शहरों में तो जागरूकता की कमी है है हीं, उससे अधिक भयावह हालात गांवों के है। जहंा ग्रामीणजन नेत्रदान को धार्मिक आस्था से जोड़ेे बैठे है। इस कारण वहंा नेत्रदान बिलकुल नहीं हो पा रहा है।
डॉ. झाला ने बताया कि 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाए जा रहे नेत्रदान पखवाड़े के तहत संस्थान की ओर से नेत्रदान को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अस्पताल से लेकर मॉल, वृद्धाश्रम और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर लोगों को नेत्रदान का महत्व एवं इसकी प्रक्रिया समझाई जा रही है।
संस्थान की निदेशक लक्ष्मी झाला ने बताया कि अस्पताल के स्वागत कक्ष से लेकर बहिरंग रोगी विभाग और चिकित्सकों की जांच तक मरीजों एवं उनके परिजनों को पुस्तिकाओं तथा जागरूकता वार्ताओं के माध्यम से नेत्रदान की जानकारी दी गई। इसके अलावा सेलिब्रेशन मॉल में नेत्र जांच एवं जागरूकता शिविर, अस्पताल में पोस्टर प्रतियोगिता तथा बहिरंग रोगी विभाग में विशेष जागरूकता वार्ताएं आयोजित की गईं।
संस्थान की मिनाक्षी चुण्डावत ने बताया कि अभियान के तहत 27 अगस्त को पूज्य ओल्ड एज होम, भुवाणा तथा 1 सितंबर को श्रीमती कृष्णा शर्मा आनंद वृद्धाश्रम, तारा संस्थान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें वरिष्ठ नागरिकों को नेत्रदान की प्रक्रिया एवं इसके सामाजिक महत्व की जानकारी दी गई।
आधुनिक तकनीक से हो रहा नेत्र रोगों का उपचार
कोर्निया सर्जन विशेषज्ञ डॉ. सुमित वार्ष्णेय ने बताया कि अलख नयन में विभिन्न नेत्र रोगों के लिए विशेषज्ञ क्लीनिक एवं आधुनिक चिकित्सा तकनीकें उपलब्ध हैं। ड्राई आई क्लीनिक में आईडीआरए से जांच और ई-आई आईआरपीएल थैरेपी से उपचार किया जा रहा है। एम्ब्लायोपिया क्लीनिक में बाइनॉक्स आधारित उपचार तथा लेसिक एवं रिफ्रेक्टिव सेवाओं में श्विंड अमारिस आरएस से ट्रांस-पीआरके की सुविधा उपलब्ध है।
कोर्निया सर्जन विशेषज्ञ डॉ. क्षिती सरूपरिया ने बताया कि डॉ. डायबिटिक रेटिनोपैथी क्लीनिक में जीस ओसीटी से रेटिना की जांच के साथ आवश्यकता अनुसार इंट्राविट्रियल इंजेक्शन एवं उन्नत विट्रियो-रेटिनल सर्जरी की सुविधा दी जा रही है। बच्चों के लिए आरओपी स्क्रीनिंग एवं उपचार की सुविधा है। वहीं ऑक्युलोप्लास्टी क्लीनिक में कॉस्मेटिक आई सर्जरी, स्क्विंट सर्जरी एवं आई ट्यूमर सर्जरी की सेवाएं उपलब्ध हैं।
कैटरैक्ट सर्जरी में आधुनिक आईओएल के चयन एवं सर्जिकल प्लानिंग के लिए आर्गाेस और एल्कॉन वेरियन सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा मायोपिया एवं लो विजन क्लीनिक के माध्यम से भी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
8 सितंबर को जुटेंगे मेडिकल छात्र एवं विशेषज्ञ
नेत्रदान एवं आधुनिक कॉर्निया चिकित्सा के प्रति युवा चिकित्सा समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 8 सितंबर को सीएमई एवं लघु कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसमें मेडिकल छात्र एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ प्रशिक्षणार्थी भाग लेंगे। कार्यक्रम में केराटोप्लास्टी, कॉर्निया प्रत्यारोपण एवं नेत्रदान पर विशेषज्ञ चर्चा के साथ प्रश्नोत्तरी एवं आकर्षक पुरस्कार भी रखे गए हैं।
करीब 30 लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प
नेत्रदान पखवाड़े के दौरान अस्पताल, सेलिब्रेशन मॉल, वृद्धाश्रमों एवं अन्य जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 30 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया है।
संस्थान का उद्देश्य नेत्रदान को केवल एक पखवाड़े की गतिविधि तक सीमित न रखकर इसे समाज की निरंतर जनभागीदारी का हिस्सा बनाना है, ताकि कॉर्निया की आवश्यकता वाले अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों को फिर से दुनिया देखने का अवसर मिल सके।
