उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक चातुर्मास प्रवचनमाला में रविवार को साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने भगवान महावीर की तपस्या और ध्यान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान महावीर की साधना उनके स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समस्त जीवों के आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए थी। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य मात्र 48 मिनट तक उत्कृष्ट ध्यान में स्थिर हो जाए तो केवल्य ज्ञान की प्राप्ति संभव है।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि आज का मनुष्य सुविधा और आराम का जीवन चाहता है। हर कार्य को आसान बनाने के लिए मशीनों का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन आत्मा की शुद्धि का मार्ग तप, त्याग और संयम से होकर गुजरता है। भगवान महावीर ने कठिन तपस्या का मार्ग इसलिए चुना ताकि मानवता को धैर्य, सहनशीलता और आत्मबल का संदेश मिल सके। उन्होंने कहा कि हम थोड़ी-सी गर्मी, मच्छरों या असुविधा को भी सहन नहीं कर पाते, जबकि परमात्मा ने वर्षों तक कठोर तप कर आत्मा को निर्मल बनाया। बिना तप और कष्ट सहे आत्मा का मैल दूर नहीं हो सकता। प्रवचन के दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली ने प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है। उन्होंने कहा कि दो दशक पहले उदयपुर की जलवायु अधिक शीतल और सुखद थी, लेकिन आज एसी, फ्रिज और अन्य संसाधनों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सभी से इनका संयमित उपयोग करने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।
उन्होंने प्रेरक उदाहरण देते हुए कहा कि अगरबत्ती स्वयं जलकर पूरे वातावरण को सुगंधित करती है। उसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी ऐसा होना चाहिए कि वह स्वयं कठिनाइयों का सामना करते हुए भी दूसरों के जीवन में सुख, शांति और प्रेरणा का संचार करे तथा किसी को कष्ट न पहुँचाए।
इस अवसर पर उज्जैन से पधारे श्रद्धालु संजय धाकड़ एवं उनकी धर्मसहायिका का बहुमान किया गया। साध्वी श्रीजी ने बताया कि उन्होंने दस वर्ष पूर्व 27 लाख रुपये की प्रभावना अर्पित की थी, जिसकी अनुमोदना करते हुए उनके धार्मिक समर्पण की सराहना की गई।
प्रवचन का शुभारंभ साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमनरुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मयरुचि श्रीजी के मंगलाचरण से हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में उपस्थित होकर भगवान महावीर के तप, संयम और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर अध्यक्ष राज लोढ़ा,चातुर्मास संयोजक गजेन्द्र भंसाली, सचिव दलपत दोशी, सुभाष महात्मा सहित सैकड़ों श्रावक मौजूद थे।
महावीर की तपस्या हमारे आत्मकल्याण का मार्ग, 48 मिनट का उत्कृष्ट ध्यान दिला सकता है केवल्य ज्ञान: साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
