चार माह तक बहेगी धर्म, ज्ञान और साधना की अमृतधारा, उपाध्याय डॉ. रमेश मुनि बोलेःकषायों पर विजय ही आत्मकल्याण का मार्ग
उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में रविवार को देवेंद्र धाम में चातुर्मास मंगल प्रवेश समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। उपाध्याय पूज्य डॉ. रमेश मुनि महाराज, प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज, डॉ. सुरेंद्र मुनि महाराज एवं मुनि दीपेश मुनि महाराज का भव्य शोभायात्रा के साथ देवेंद्र धाम में मंगल प्रवेश कराया गया। भगवान महावीर के जयघोष, भक्ति गीतों और मंगल ध्वनियों से पूरा वातावरण धर्ममय हो उठा। सैकड़ों श्रद्धालु ध्वज-बैनर एवं मंगल कलश के साथ शोभायात्रा में शामिल हुए।
प्रातःकाल पूर्व महापौर रजनी वीरेंद्र डांगी के निवास से निकली शोभायात्रा का विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। देवेंद्र धाम पहुंचने पर संत भगवंतों का भव्य अभिनंदन हुआ तथा नव निर्मित श्री महावीर समवसरण में धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण और स्तवन के साथ हुआ।
धर्मसभा में उपाध्याय पूज्य डॉ. रमेश मुनि महाराज ने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों पर विजय प्राप्त कर ही व्यक्ति आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से चातुर्मास के दौरान नियमित प्रवचन, सामायिक, स्वाध्याय, तप एवं सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, आत्मज्ञान और आध्यात्मिक जागरण का महापर्व है। वर्तमान समय में विश्व में बढ़ती अशांति के बीच भगवान महावीर के अहिंसा, करुणा और शांति के सिद्धांत ही मानवता को सही दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा, “यदि आप धर्म की रक्षा करेंगे, तो धर्म भी आपकी रक्षा करेगा।”
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. सुरेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि उदयपुर समाज ने जिस आत्मीयता और भव्यता से संतों का स्वागत किया है, वह भगवान महावीर के सिद्धांतों के प्रति समाज की अटूट आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आगामी चार महीनों तक देवेंद्र धाम में धर्म, ज्ञान और साधना की अविरल गंगा बहेगी। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन केवल एक घंटा धर्मसभा के लिए निकाले तो पूरे चातुर्मास में यह समय मात्र पांच दिनों के बराबर होगा। उन्होंने सभी को “जियो और जीने दो” का संदेश जीवन में उतारने का आह्वान किया।
समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया जब पूर्व महापौर रजनी वीरेंद्र डांगी समाजजनों को संबोधित करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि यह चातुर्मास केवल आयोजन नहीं, बल्कि पूरे समाज की आध्यात्मिक साधना का महापर्व है। उन्होंने सभी से तन, मन और धन से सहभागिता निभाकर इस चातुर्मास को ऐतिहासिक एवं श्रेष्ठतम बनाने का आह्वान किया।
धर्मसभा में साध्वी शीतलश्री म.सा. एवं साध्वी मंजुलज्योति श्रीजी म.सा. ने भी प्रेरणादायी प्रवचन दिए। श्राविका संघ एवं महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण, स्तवन एवं भक्ति भजनों की मनोहारी प्रस्तुतियां दी गईं। साथ ही चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई तथा समाजजनों ने तप, त्याग और विभिन्न आराधनाओं के संकल्प लिए।
समारोह में जोधपुर, पाली, दिल्ली, राजसमंद, सूरत, मुंबई सहित मेवाड़ और मारवाड़ के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रीसंघ ने मुख्य अतिथि मांगीलाल लुणावत, सुनील लुणावत, दिल्ली नवकार तीर्थ के अध्यक्ष प्रशांत जैन तथा जैन कॉन्फ्रेंस के पदाधिकारियों सहित अन्य अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
इस अवसर पर सूरत से विनीता चौरड़िया, पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी, राजकुमार फत्तावत, कांतिलाल जैन, निर्मल पोखरना, संघ के अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन, महामंत्री हिम्मत बड़ाला, कोषाध्यक्ष दिनेश हिंगड़, श्राविका संघ की अध्यक्ष संतोष मेहता, राजस्थान जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की पुष्पा खोखावत,रमेश खोखावत, दिनेश चोरड़िया,नरेन्द्र डांगी सहित अनेक गणमान्यजनों ने विचार व्यक्त करते हुए चातुर्मास को आत्मचिंतन, आत्मसाधना और धर्म आराधना का सर्वोत्तम अवसर बताया तथा प्रतिदिन प्रातः 9 से 10 बजे तक गुरुदेव की अमृतवाणी का लाभ लेने का आग्रह किया।
प्रारंभ में संघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन ने सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए चातुर्मास के दौरान नियमित प्रवचन में उपस्थित रहने का आह्वान किया। बाहर से आए अतिथियों का शॉल, उपरना एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। आज की गौतम प्रसादी के लाभार्थी गोपाल मुणोत एवं अनिल पुनमिया परिवार रहे। अंत में महामंत्री हिम्मतलाल बड़ाला व कोषाध्यक्ष दिनेश हिंगड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया।
भक्ति, श्रद्धा और जयघोषों के बीच देवेंद्र धाम में हुआ भव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश
