चीरवा टनल में बड़े हादसे से निपटने का अभ्यास, NDRF, SDRF और सिविल डिफेंस ने किया संयुक्त मॉक ड्रिल

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर. राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चीरवा टनल में किसी बड़े हादसे की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य किस तरह किया जाएगा, इसका अभ्यास बुधवार को संयुक्त मॉक ड्रिल के माध्यम से किया गया। इस अभ्यास में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और सिविल डिफेंस की टीमों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और आपदा के समय त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना था।

मॉक ड्रिल के दौरान एक काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें चीरवा टनल के भीतर पहाड़ का हिस्सा गिरने और सड़क दुर्घटना होने से कई लोगों के फंसने की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही संबंधित विभागों की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। टीमों ने सबसे पहले घटनास्थल का आकलन किया, इसके बाद मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।

रेस्क्यू टीमों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से घायलों को बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार देने के बाद उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजने का अभ्यास किया। इस दौरान पुलिस और अन्य विभागों ने भी यातायात व्यवस्था और मौके पर आवश्यक समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाई। पूरे अभियान में यह देखा गया कि किसी वास्तविक आपदा की स्थिति में सभी एजेंसियां किस तरह एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर कम से कम समय में राहत कार्य पूरा कर सकती हैं।

मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ की ओर से सेकंड इन कमांड अनुपम और इंस्पेक्टर रणजीत सिंह पटेल मौजूद रहे। एसडीआरएफ की ओर से कंपनी कमांडर महेंद्र सिंह ने टीम का नेतृत्व किया। वहीं सिविल डिफेंस की ओर से सहायक प्रशासनिक अधिकारी धनेंद्र कश्यप और वरिष्ठ सहायक गोविंद जगरवाल ने अभियान में भाग लिया और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभाली।

अधिकारियों ने बताया कि चीरवा टनल राष्ट्रीय राजमार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की दुर्घटना, भूस्खलन या अन्य आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य में देरी न हो, इसके लिए समय-समय पर इस तरह के संयुक्त अभ्यास किए जाते हैं। इससे संबंधित एजेंसियों की तैयारी का आकलन होता है और कमियों को भी दूर किया जा सकता है।

अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य केवल उपकरणों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित रिस्पॉन्स और प्रभावी रेस्क्यू सिस्टम विकसित करना है। भविष्य में यदि किसी वास्तविक आपदा की स्थिति उत्पन्न होती है तो प्रशिक्षित टीमें बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर सकेंगी, जिससे जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।

By Udaipurviews

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