सक्सेना मातिमान कायस्थ सभा उदयपुर की अनुकरणीय पहल, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में वितरित की शैक्षणिक सामग्री
उदयपुर, 18 जुलाई। समाज सेवा, शिक्षा प्रोत्साहन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को साकार करते हुए सक्सेना मातिमान कायस्थ सभा, उदयपुर द्वारा संचालित शिक्षा सहयोग अभियान के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक शिक्षा सामग्री पहुँचाने का प्रेरक कार्य सम्पन्न किया गया।
अभियान के अंतर्गत झाड़ोल एवं कुराबड़ क्षेत्र के विभिन्न राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कुल 469 विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी एवं गणित की कॉपियाँ तथा पेंसिल, इरेज़र, शार्पनर एवं स्केल सहित आवश्यक लेखन सामग्री वितरित की गई।
सभा अध्यक्ष श्री तरुण कुमार सक्सेना ने बताया कि शिक्षा सहयोग अभियान का उद्देश्य केवल शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुचि, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक सोच का विकास करना है। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से किए गए ऐसे प्रयास विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अभियान के प्रथम चरण में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, पालिया खेड़ा (झाड़ोल) के 221 विद्यार्थियों को शिक्षा सामग्री वितरित की गई।
अभियान के द्वितीय चरण में राजकीय प्राथमिक विद्यालय, गमेती बस्ती, मंदेसर (60 विद्यार्थी) ,राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, मंदेसर का गुड़ा (52 विद्यार्थी) के कुल 112 विद्यार्थियों को सामग्री प्रदान की गई।
अभियान के तृतीय चरण में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, भेंकरा (100 विद्यार्थी) ,राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रामजखेड़ा (36 विद्यार्थी) के 136 विद्यार्थियों को स्टेशनरी एवं लेखन सामग्री वितरित की गई।
इस प्रकार अभियान के माध्यम से कुल 469 विद्यार्थियों तक शिक्षा सहयोग पहुँचाया गया।
सभा महासचिव डॉ. मनीष सक्सेना ने कहा कि यह अभियान समाज की सेवा भावना और सामूहिक सहभागिता का परिणाम है। उन्होंने बताया कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य परोपकार एवं समाज हित में योगदान देना है। जिस प्रकार वृक्ष अपने फल, नदियाँ अपना जल और प्रकृति की अन्य शक्तियाँ दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित रहती हैं, उसी प्रकार समाज के सक्षम लोगों को भी शिक्षा एवं सेवा के क्षेत्र में आगे आना चाहिए।
युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्री गौरव सक्सेना ने कहा कि युवाओं की सहभागिता से समाज सेवा के कार्यों को नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने सभी युवाओं एवं समाजबंधुओं से ऐसे सेवा अभियानों से जुड़ने का आह्वान किया।
संस्कृति संवाहिका महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्रीमती अनुभा सक्सेना ने कहा कि महिला प्रकोष्ठ की मातृशक्ति ने इस अभियान में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। विद्यार्थियों के चेहरों पर आई मुस्कान और उनके भीतर दिखाई दिया उत्साह ही इस सेवा कार्य की सबसे बड़ी सफलता है।
विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों ने सभा की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह सहयोग अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों में अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत करते हैं। ग्रामीणों ने भी इस मानवीय पहल के लिए सभा के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
इस सेवा अभियान को सफल बनाने में आर्थिक सहयोग प्रदान करने वाले सभी दानदाता सदस्यों एवं प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता निभाने वाले सदस्यों के प्रति सभा ने हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की।
आर्थिक सहयोग प्रदान तथा विभिन्न चरणों में सक्रिय सहभागिता निभाने वाले सदस्यों में— डॉ. अशोक कुमार सक्सेना, जूही प्रधान, निशित सक्सेना, विजय बहादुर रायजादा, तरुण सक्सेना, डॉ. राजीव सक्सेना, अनिल सक्सेना, दिनेश सक्सेना, कौशल के. सक्सेना, वैभव सक्सेना, योगेश सक्सेना, सुबोध सक्सेना, रश्मि अनुपम सक्सेना, प्रदीप सक्सेना, विष्णु सक्सेना, गौरव सक्सेना, अमित सक्सेना, नंदकिशोर सक्सेना, रविंद्र प्रकाश सक्सेना, मोहित सक्सेना, आदर्श कुमारी सक्सेना, संजीव सक्सेना, आरती सक्सेना, डॉ. वीणा सक्सेना, सुनील सक्सेना, सोनल सक्सेना, अनुभा सक्सेना, हर्षिता सक्सेना, सुरभि सक्सेना, डॉ. ममता सक्सेना, श्रद्धा सक्सेना, सौरभ सक्सेना एवं बिना सक्सेना प्रमुख हैं।
सभा ने सभी सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सामूहिक शक्ति से ही सेवा कार्यों को व्यापक और प्रभावी स्वरूप दिया जा सकता है।
“शिक्षा का प्रकाश जब दूरस्थ अंचलों तक पहुँचता है, तो वह केवल विद्यार्थियों का भविष्य नहीं बदलता, बल्कि पूरे समाज के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।”
