मां का किसी भी जीवन में ऋण नहीं चुकाया सकताःविरलप्रभाश्री
उदयपुर। सूरजपोल दादावाड़ी में विराजित साध्वी विरल प्रभा श्रीजी, विपुल प्रभा श्रीजी एवं कृतार्थ प्रभा श्रीजी ने आज “मां “ विषय पर अत्यंत सारगर्भित प्रवचन देते हुए कहा कि मां का ही संतान से जन्म होने से पूर्व संबंध होता है, बाकी सारे रिश्ते नाते सभी जन्म के पश्चात् बनते हैं, मां का किसी भी जीवन में ऋण नहीं चुका सकता है। यदि मनुष्य अपनी स्वयं की चमड़ी की जूती भी बनाकर मां को पहिना दे तब भी वह मां का ऋण नहीं चुका सकता है। साध्वी श्री विपुल प्रभा श्रीजी ने श्रवण कुमार के माता पिता आदि का उदाहरण…
