साहित्यकार के लिए स्वाध्याय व मौलिक लेखन अति महत्वपूर्ण – हरिहर
अखिल भारतीय साहित्य परिषद की बैठक में हुआ साहित्य की विविध विधाओं पर विमर्श उदयपुर, 15 सितम्बर। लोक जनमानस में विपुल साहित्य बिखरा पड़ा है जो दैनिक जीवन की छोटी-मोटी घटनाओं एवं वार्तालाप में देखने को मिल जाता है। एक साहित्यकार को चाहिए कि वह उसका अवलोकन करें एवं भरपूर स्वाध्याय करने के तत्पश्चात स्वयं के मौलिक लेखन के माध्यम से साहित्य को समृद्ध करने में अपना योगदान दें। यह विचार अखिल भारतीय साहित्य परिषद के चित्तौड़गढ़ प्रांत अध्यक्ष विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ ने रविवार को अपने उदयपुर प्रवास के दौरान परिषद के पदाधिकारियों की बैठक में व्यक्त किए। बैठक में प्रांत उपाध्यक्ष…
