-आदिवासी समाज पर सबसे बड़ा खतरा धर्मांतरण और अस्मिता पर चोट: डॉ मन्ना लाल रावत
-समाज के विकास के लिए राजनीतिक से ऊपर उठकर काम करना होगा: रघुवीर सिंह मीणा
-श्री मेवाड़ वागड़ मालवा जनजाति समाज संस्थान की ओर से आयोजित हुआ 12वां अंचल स्तरीय जनजाति प्रतिभा सम्मान एवं सर्व समाज शिक्षक गौरव समारोह
-शिक्षा, खेल, समाजसेवा सहित कई क्षेत्रों में प्रतिभाओं का किया सम्मान
उदयपुर। उदयपुर। श्री मेवाड़ वागड़ मालवा जनजाति समाज संस्थान की ओर से 12वीं अंचल स्तरीय जनजाति प्रतिभा सम्मान एवं सर्व समाज शिक्षक गौरव समारोह रविवार को सुखाडिया रंगमंच पर आयोजित हुआ। समारोह में शिक्षा, खेल, समाजसेवा सहित कई क्षेत्रों विभिन्न पुरस्कारों से प्रतिभाओं को नवाजा गया।
इस आयोजन में लगभग 600 से अधिक प्रतिभाओं का सम्मान किया गया जिसमें उदयपुर, बांसवाडा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, राजसमन्द, भीलवाड़ा, सिरोही, सलूम्बर, चितौड़गढ़ एवं पाली जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएं शामिल थीं।
समारोह के मुख्य अतिथि केबिनेट मंत्री बाबूलाल खराडी ने कहा कि जहां धर्मांतरण होता है, वहां आस्था पर चोट पहुंचती है जो आगे जाकर अलगाव पैदा होता है। यह देश व समाज के लिए ठीक नहीं है। क्षेत्र में युवाओं को पत्थरबाज बनाने वाले लोग और स्थिति खतरनाक है। यह देश के लिए भी खराब है। हमारा गौरव है कि हम क्षेत्रवासी मिलझुल कर रहते हैं, समरस भाव से रहते हैं। समाज में भरोसा टूट जाना बुरी स्थिति है। इतिहास की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी सदैव ही मातृभूमि के लिए लड़ा व जिया है। यह अतिथि देवो भवः में विश्वास करता है। सनातन संस्कृति का मूल्य है। इस बात का उल्लेख किया कि प्राचीन काल में सभी गुरुकुल आदिवासी क्षेत्र में हुआ करते थे। उनके अनुसार कान्वेंट स्कूल में पठन सामग्री से समाज के अनुशासन को तोड़ा है। यह संस्कृति तोड़ने वाला है। उन्होंने नौकरी करने वालों को सावधान किया कि अब कुछ लोग नौकरी करने वालों को भी टारगेट कर रहे हैं। सकारात्मक और राष्ट्रीय भाव ही समाज को जोड़ सकता है जिंदगी में उन्नति करा सकता है।
संस्थान केंद्रीय संयोजक मन्नालाल रावत ने आदिवासी समाज के विकास के लिए अस्मिता, अस्तित्व और विकास के विचार को पीपीटी के माध्यम से सभी के समक्ष रखा। उनका आग्रह था समाज की मूल पहचान बना रखना आवश्यक है, अन्यथा तोड़ने वाली शक्तियां आने वाले समय में हानिकारक होगी। धर्मान्तरण और लव जिहाद समाज के लिए सबसे बड़े खतरे हैं। इसलिए पढ़े लिखे लोग को समूह बना कर एक होकर रहना होगा। मोदी सरकार द्वारा घोषित जनजाति गौरव दिवस व धरती आबा जनजाति उन्नत ग्राम अभियान के सकारात्मक प्रभाव को बताया। सभी के कल्याण के लिए जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार समाज के ऐतिहासिक नायकों के नाम पर है जो सदैव प्रेरणा देते हैं एवं समाज की अस्मिता को ताकत देते हैं। यह समाज के गौरव है।
आयोजन के विशिष्ट अतिथि रघुवीर सिंह मीणा ने राजनीतिक से ऊपर उठकर सामाजिक में काम करने का आग्रह किया। इसके लिए सभी से योगदान का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह संगठन राजनीति से उपर उठकर बनाया गया है। उन्होंने दुख जाहिर किया कि आदिवासी समाज के वोट लेकर जीतने वाले आदिवासी नेता ही इस कार्यक्रम में आने से कतराते हैं।
पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया ने अच्छे कार्यक्रम के लिए सभी को शुभकामनाएं दी और कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के जरिए आदिवासी युवाओं को आगे बढाने में मदद मिलेगी। पूर्व महापौर पारस सिंघवी ने आदिवासी समाज को मेहनती समाज बताया। कौशल विकास में वृद्धि करने का आग्रह किया।
समारोह में लेक्रोस खेल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाली भारतीय टीम की कप्तान सुनीता मीणा को श्री मानगढ़ धाम गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह में उन प्रतिभाओं को जिन्होंने, विश्वविद्यालयी परीक्षाओं में स्वर्ण पदक या पीएच.डी. डिग्री प्राप्त की है उन्हें आदि कवि वाल्मीकि गौरव पुरस्कार प्रदान किया गया। जो प्रतिभाएं अखिल भारतीय या राज्य स्तरीय प्रतिष्ठित सेवाओं में चयनित हुई हैं उन्हें मेवाड़ वीर राणा पूंजा भील प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जिन्होंने मेडिकल, प्रबंधन, इंजीनियरिंग आदि से सम्बन्धित प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रदेश प्राप्त किया है उन्हें वीर बालक एकलव्य प्रतिभा पुरस्कार प्रदान किया गया। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वालों को शहीद वीर बाला काली बाई प्रतिभा पुरस्कार किया गया। इनके अलावा शहीद नानकजी भील सामाजिक नेतृत्व पुरस्कार से उन सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया जिन्होंने अंचल के विभिन्न जिलों में प्रेरक सामाजिक कार्य किये हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में प्रतिभागी रहने वाले तथा राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर प्रतिष्ठित खेल स्पर्धा में पदक प्राप्त करने वालो को पद्मश्री धनुर्धर श्री लिम्बाराम खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
संस्थान के अध्यक्ष प्रभुलाल डेंडोर ने संस्थान की गतिविधियों के साथ सभी अतिथियों को स्वागत किया और आगे भी कार्यक्रम चलता रहे ऐसे सहयोग का आह्वान किया।
कार्यक्रम संयोजक भरत मीणा ने इस भव्य कार्यक्रम के थीम जनजाति अस्मिता से जुड़े आदिवासियों के कुंभ के नाम विख्यात बेणेश्वर धाम के बारे में परिचय कराया।
महासचिव डॉ शंकर बामनिया ने संस्थान द्वारा संपादित की जा रही प्रमुख गतिविधियों एवं आवंटित भूखंड पर भावी भवन निर्माण की रूपरेखा के बारे में बताया ताकि आने वाले समय में वहाँ कोचिंग की व्यवस्था की जाये। राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य का समारोह आ न सके और संस्थान के संदेश भेजा जो सीबी मीणा द्वारा वाचन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान की वार्षिक स्मारिका उडान-एक प्रेरणा का विमोचन किया गया तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं कैरियर काउंसलिंग संस्थान की ओर से तैयार की गई गौरव की राहें डॉक्यूमेन्टरी फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। समारोह में टी सी डामोर पूर्व आईजी एवं पूर्व उपकुलपति जनजाति विश्वविद्यालय, विधायक सलूम्बर शांता मीणा, राकेश जी हीरत पूर्व निदेशक ख़ान विभाग, प्रो बालूदान बारहठ, संस्थान के उपाध्यक्ष सी बी मीणा, महासचिव डॉ शंकर बामनिया, निरंजन दरंगा कोषाध्यक्ष ,भरत परमार कार्यक्रम संयोजक,पूर्व जिला प्रमुख डूंगरपुर माधवलाल वरहट, जिला परिषद दौलत सिंह कलासुवा, उदयपुर तथा क्षेत्र के विधायक, पूर्व सांसदगण/विधायकग ,सामाजिक कार्यकर्ता सहित 1200 से ज़्यादा प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। मंच का संचालन सीबी मीणा, डॉ विकास बामनिया, डॉ संजय मानत, धनपत सिंह ने किया। संस्थान के सभी पदाधिकारी हरीश कलासुवा, केशवलाल मीणा, रमेश असोड़ा, संतोष परमार, भेरूलाल मीणा, रूपलाल मीणा, रितेश परमार, राहुल मीणा, विशाल बमानिया, बलदेव दरंगा, दीपक दरंगा, डॉ प्रेमशंकर मीना, डॉ तिलक भगोरा, लालूराम गरासिया आदि भी उपस्थित रहे।
जहां धर्मांतरण वहां अलगाव पैदा होता है: बाबूलाल खराड़ी
