मन पर विजय ही सच्ची जीत, आत्मा ही परमात्माःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में बुधवार को आयोजित नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को जीवन में संस्कार, आत्मबल और संयम का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष ओलीजी की आराधना करते हैं और मैना सुंदरी के जीवन से हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य एवं साहस के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि बचपन में दिए गए संस्कार ही व्यक्तित्व की मजबूत नींव बनते हैं। बचपन जिसका सुधर गया, समझो उसका पूरा जीवन सुधर गया। जिस प्रकार मजबूत नींव पर शानदार भवन का निर्माण होता है, उसी प्रकार बचपन में दिए गए संस्कार व्यक्ति को जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति देते हैं। उन्होंने कहा कि आज छोटी-छोटी परेशानियों से लोग निराश होकर आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। जीवन में एक रास्ता बंद हो तो दूसरा रास्ता खुल सकता है, इसलिए कठिन परिस्थितियों में धैर्य नहीं खोना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। कर्म ग्रंथ का सिद्धांत बताता है कि हमें जो प्राप्त होता है, वह हमारे पूर्व कर्मों का परिणाम है। अपने कर्मों और आचरण के परिणामों को स्वयं ही भोगना पड़ता है।
साध्वी श्रीजी ने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक दार्शनिक जब पागलखाने के निरीक्षण पर गया तो एक व्यक्ति को पोस्टकार्ड लिखते देखा। पूछने पर उसने कहा कि वह स्वयं को ही पत्र लिख रहा है। जब पूछा गया कि पत्र में क्या लिखा है, तो उसका उत्तर थाकृ“पागल दिखते हो।” साध्वी श्रीजी ने कहा कि इस प्रसंग में गहरी सीख छिपी है। कर्म करने वाला भी हम हैं और उसका फल प्राप्त करने वाला भी हम ही हैं। हमारे आचरण की प्रतिक्रिया अंततः हमें ही प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि सूर्य बादलों से ढक सकता है, लेकिन उसका अस्तित्व समाप्त नहीं होता। इसी प्रकार क्रोध, मोह, राग-द्वेष, लोभ और माया जैसी कषायें आत्मा के वास्तविक स्वरूप को ढक देती हैं। इन कषायों पर विजय प्राप्त करना ही जीवन का सबसे कठिन युद्ध है। मन पर विजय ही सच्ची विजय है और आत्मा ही परमात्मा है।
ट्रस्ट अध्यक्ष राज लोढ़ा ने बताया  कि  अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!