उदयपुर। सकल दिगंबर जैन समाज सेक्टर-14 के तत्वावधान में महावीर भवन में पर्युषण पर्व श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पर्युषण पर्व के अष्टम दिन उत्तम त्याग धर्म दिवस पर प्रातः श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा विधि-विधान से संपन्न हुई। शांतिधारा का पुण्यार्जन भूपेंद्रकुमार पुंजावत परिवार ने प्राप्त किया।
धर्मसभा में पंडित रविकीर्ति ने कहा कि मोह, राग-द्वेष और अहंकार को छोड़कर निस्वार्थ भाव से दान एवं त्याग करना ही उत्तम त्याग धर्म है। उन्होंने कहा कि जिस वस्तु पर वास्तव में हमारा अधिकार नहीं है, उसमें ‘मेरा’ भाव रखना मोह है। इस मोह और आसक्ति का त्याग करना ही सच्चे अर्थों में त्याग धर्म है। उन्होंने कहा कि त्याग केवल वस्तुओं को छोड़ना नहीं, बल्कि मन के भीतर से आसक्ति, अहंकार और स्वार्थ को दूर करना है।
इस अवसर पर सौधर्म इंद्र-इंद्राणी योगेशकुमार जी एवं प्रीति देवी गदावत के सानिध्य में पूजा-अर्चना सहित विभिन्न मांगलिक कार्यक्रम श्रद्धापूर्वक संपन्न हुए।
श्री महावीर दिगंबर जैन दशा नागदा चेरिटेबल ट्रस्ट के महामंत्री भूरीलाल जैन ने बताया कि 25 सितंबर को तपस्वियों एवं प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही पर्युषण पर्व को सफल बनाने में सहयोग देने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हुए क्षमावाणी पर्व भी आयोजित किया जाएगा। परिषद महामंत्री कल्पेश मुंडलिया ने बताया कि जैन पाठशाला के बालकों द्वारा जैन धर्म पर आधारित सामूहिक नृत्य की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।
उत्तम त्याग धर्म का संदेशः मोह, राग-द्वेष और अहंकार छोड़कर करें निस्वार्थ दान
