उदयपुर, 22 सितम्बर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेन्द्र धाम में आयोजित धर्मसभा में डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि भगवान महावीर की शिक्षाओं को केवल सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना ही सच्ची साधना है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर की वाणी आगम वाणी है, जिसमें अहिंसा, सत्य, क्षमा, अनेकांत, दया, दान और पुण्य जैसे जीवनोपयोगी सिद्धांत निहित हैं। आगमों का नियमित पठन-पाठन ही वास्तविक स्वाध्याय है।
मुनि श्री ने आचार्य मानतुंग की भक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्ची भक्ति सहज भाव से हृदय से निकलती है। प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि सगुण और निर्गुण दोनों प्रकार की भक्ति आत्मा को परमात्मा के परम पद तक पहुंचाने में सहायक हैं। उन्होंने कथनी और करनी में एकरूपता को आवश्यक बताते हुए कहा कि बाहरी दिखावे के बजाय अंतर्मन की शुद्धता महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर दिल्ली, भीलवाड़ा जोधपुर सूरत सहित विभिन्न शहरों से आए समाजसेवियों का अभिनंदन किया गया। दीक्षार्थी बहन का विशेष बहुमान हुआ। अखिल भारतीय जैन कॉन्फ्रेंस राजस्थान प्रांतीय अध्यक्षा पुष्पा रमेश खोखावत को जन्मदिन पर समाजबंधुओं ने शुभकामनाएं दीं।
भगवान महावीर की शिक्षाओं को जीवन में उतारना ही सच्ची साधनाःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
