तप की अग्नि कर्मों का नाश कर आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है रू पं. रविकीर्ति

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। सकल दिगंबर जैन समाज सेक्टर-14 की ओर से महावीर भवन में पर्युषण पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पर्युषण पर्व के सप्तम दिन उत्तम तप धर्म दिवस के अवसर पर प्रातःकाल श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा विधिपूर्वक संपन्न हुई। शांतिधारा का पुण्यार्जन जमनालाल जी मुंडलिया परिवार ने प्राप्त किया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पंडित रविकीर्ति जी ने कहा कि इच्छाओं का निरोध करना तथा मन, वचन और कर्म को संयमित कर कर्मों की निर्जरा करना ही उत्तम तप धर्म है। तप वह अग्नि है, जो कर्म रूपी पर्वतों को नष्ट करने के लिए वज्र के समान है। उन्होंने कहा कि जीवन में संयम, त्याग और आत्मानुशासन अपनाकर व्यक्ति आत्मशुद्धि की ओर अग्रसर हो सकता है।
इस अवसर पर सौधर्म इंद्र-इंद्राणी दिनेशकुमार जी एवं जयश्री देवी मुंडलिया के सानिध्य में पूजा-अर्चना सहित विभिन्न मांगलिक कार्यक्रम श्रद्धापूर्वक संपन्न हुए।
श्री महावीर जैन युवा परिषद के अध्यक्ष हितेश मुंडलिया ने बताया कि त्रिशला महिला मंडल की ओर से जैन धर्म पर आधारित नाटक का मंचन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से धर्म एवं संस्कारों का संदेश दिया जा रहा है।
ट्रस्ट अध्यक्ष भंवरलाल मुंडलिया ने बताया कि 27 सितंबर को श्रीजी की पालकी शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो गोवर्धनसागर पहुंचेगी। वहां श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा होगी। उन्होंने सभी साधर्मी बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में शोभायात्रा में शामिल होकर पर्युषण पर्व को सफल बनाने का आग्रह किया।

By Udaipurviews

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