आदिवासी दिवस पर राजनीति नहीं, आदिवासी समाज के भविष्य पर हो सार्थक बहस : बंशी लाल कटारा

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें
डूंगरपुर। आदिवासी दिवस को लेकर सांसद राजकुमार रोत द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर लगाए गए आरोपों पर भाजपा नेता एवं किसान मोर्चा प्रदेश मंत्री बंशी लाल कटारा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आदिवासी समाज को केवल एक दिन की बधाई और प्रतीकों की राजनीति तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। आज आवश्यकता इस बात की है कि आदिवासी समाज के भविष्य, शिक्षा, रोजगार, खेल, स्वास्थ्य और विकास पर गंभीर चर्चा हो।
कटारा ने कहा कि यदि हम वास्तव में आदिवासी समाज के हितैषी हैं तो हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि हमारे बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें, डॉक्टर-इंजीनियर बनें, सरकारी एवं निजी क्षेत्र में आगे बढ़ें, खेलों में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएं तथा रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनें।
उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में UNO का झंडा लगाया और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल यह भी है कि जब भारत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने जैसे गौरवशाली अवसर का साक्षी है, तब देशभक्ति एवं राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक तिरंगे के साथ हर घर तिरंगा और तिरंगा यात्रा जैसे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में हमारी भूमिका क्या होनी चाहिए?
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उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को दुनिया से जोड़ना है, लेकिन भारत से काटना नहीं है। आज का आदिवासी युवा पढ़ना चाहता है, तकनीक से जुड़ना चाहता है, खेलों में आगे बढ़ना चाहता है, रोजगार चाहता है और देश के विकास में अपनी भागीदारी निभाना चाहता है।
कटारा ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आदिवासी समाज को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास नहीं होना चाहिए? क्या आदिवासी समाज की पहचान को केवल पुराने प्रतीकों और पिछड़ेपन की छवि तक सीमित रखना उचित है?
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अब जागरूक है और वह भावनात्मक राजनीति से आगे बढ़कर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, खेल, सड़क, तकनीक, उद्यमिता और सम्मानजनक अवसर चाहता है।
कटारा ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक विचार या रणनीति के माध्यम से आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा से अलग करने का प्रयास किया जा रहा है, तो समाज को उस पर सवाल पूछने का पूरा अधिकार है।
“आदिवासी समाज को किसी एक दिन की बधाई तक सीमित नहीं किया जा सकता। हमें ऐसा वातावरण बनाना है जिसमें *आदिवासी युवा देश के विकास का नेतृत्व करे। आदिवासी समाज को दुनिया से जोड़ना है, लेकिन भारत से अलग नहीं करना है।”*
अंत में कटारा ने कहा कि आदिवासी समाज के मुद्दों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय शिक्षा, रोजगार, खेल, स्वास्थ्य और विकास के ठोस एजेंडे पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए। यही आने वाली पीढ़ी के हित में वास्तविक कदम होगा।
By Udaipurviews

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