वासनाओं का त्याग कर आत्मस्वरूप में लीन होना ही उत्तम ब्रह्मचर्य

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। सकल दिगंबर जैन समाज सेक्टर-14 की ओर से महावीर भवन में आयोजित दस दिवसीय पर्युषण पर्व का समापन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्वक हुआ। अंतिम दिन प्रातःकाल श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। शांतिधारा का पुण्यार्जन लॉटरी के माध्यम से गेहरी लाल देवड़ा परिवार को प्राप्त हुआ।
धर्मसभा में पंडित रविकीर्ति ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि ब्रह्म का अर्थ शुद्ध आत्मा और चर्या का अर्थ उसमें लीन होना है। समस्त विषय-वासनाओं का त्याग कर अपने ज्ञायक स्वभाव वाली आत्मा में प्रवृत्त होना ही उत्तम ब्रह्मचर्य है। उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व हमें आत्मचिंतन, संयम और त्याग के माध्यम से अपने जीवन को धर्ममय बनाने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में सौधर्म इंद्र-इंद्राणी दिलीप कुमार पंचोली एवं वर्षा देवी पंचोली के सानिध्य में पूजा-अर्चना एवं विभिन्न मांगलिक कार्यक्रम संपन्न हुए। भगवान वासुपूज्यनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य गेहरी लाल एवं झमक लाल देवड़ा परिवार को प्राप्त हुआ।
ट्रस्ट अध्यक्ष भंवर लाल मुंडलिया ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान समाजजनों ने उत्साहपूर्वक धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। ट्रस्ट महामंत्री भूरीलाल जैन ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी साधर्मियों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सहयोगी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया तथा प्रतिभाशाली बालक-बालिकाओं का भी समाज की ओर से सम्मान किया गया।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!