सुनो ध्यान से और बोलो प्यार सेःकृतार्थप्रभाश्री
उदयपुर। सूरजपोल स्थित दादाबाड़ी में साध्वी कृतार्थ प्रभा श्रीजी ने कहा कि सम्यकत्व की यात्रा छोटे छोटे स्टेधन से होकर बढ़ रही है। अनंतकाल सर अनंत भवों में भटकते हुए इस मनुष्य गति को प्राप्त किया। एकेन्द्रिय से यहां तक पहुंचे। चार इन्द्रिय वाले जीवों के पास कान नाही होते हैं सो वो परमात्मा की वाणी नाही सुन पाते। पंचेन्द्रिय यानी हम। क्या, क्यों, कैसे और किसलिए सुनना जरूरी है। हम भाग्यशाली हैं कि सुन सकते हैं। सुनना एक कला है। अगर ये जीव में आ जाये तो सदगति की ओर ले जा सकती है। सुनना आत्म कल्याण का कारण…
