– राजधानी के जयपुरिया अस्पताल में हुई महंगी कॉक्लियर इंम्प्लांट सर्जरी
-जिले के मासूम वंश प्रजापत और पारस मेघवाल जल्दी ही सामान्य तरीके से सुन और बोल सकेंगे
-गरीब परिवारो को मिली निःशुल्क उपचार की सौगात
राजसमंद, 28 जुलाई। जिले के रेलमगरा ब्लॉक की आंगनबाड़ी केन्द्र पीपलीडोडियान और भीम ब्लॉक की आंगनबाड़ी केन्द्र काछबली में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हेल्थ स्क्रीनिंग के तहत 3 वर्ष 9 माह के पारस मेघवाल और 3 वर्ष 11 माह के वंश प्रजापत को जन्मजात विकृति के ग्रस्त पाया गया। जो जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ थें। सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत इन मासूमो की स्वास्थ्य जांच कर चिन्हीत किया गया एवं मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के अन्तर्गत जयपुर के राजकीय जयपुरिया अस्पताल में दोनो बच्चो की महंगी सफल निःशुल्क कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी करके मासुमो की जिन्दगी संवार दी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में 12 टीमे कार्यरत है जों माईक्रोप्लान के अनुसार आंगनबाड़ी केन्द्रो एवं विद्यालयो में हेल्थ स्क्रीनिंग करके , बीमारीयोंको चिन्हीत कर उच्च चिकित्सा संस्थानो पर रेफर कर बच्चो का उपचार सुनिश्चित करती है।
कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केन्द्र पीपली डोडियान में नियमित स्क्रीनिंग के दौरान रेलमगरा टीम बी के डॉ दिनेश रजक को 3 वर्ष 11 माह के पारस मेघवाल में कुछ असामान्य महसूस हुआ फिर उन्होंने बच्चे को सुनने और बोलने में असमर्थ पाया। परिवार जनो से चर्चा कर निःशुल्क उपचार की जानकारी देकर बच्चे को जयपुरिया चिकित्सालय में उपचार के लिये रेफर किया जहां आवश्यक जांच कर बच्चे की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की गई। मासूम बच्चे के पिता नानालाल मेघवाल मजदूरी करके बमुश्किल परिवार को चला रहे है इसलिये उनके लिये कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी महंगी सर्जरी करना असंभव था लेकिन अब बच्चे की निःशुल्क सफल कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद पूरा परिवार खुश है।
भीम के काछबली आंगनबाड़ी केन्द्र पर नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग के तहत वंश प्रजापत में भी जन्मजात विकृति सुनने और बोलने की असमर्थता की बीमारी को डॉ महावीर प्रसाद ने चिन्हीत कर, परिवार जनो को बच्चे के निःशुल्क उपचार एवं आवश्यक जानकारी देकर जयपुर स्थित राजकीय जयपुरिया चिकित्सालय में रेफर किया। वंश के पिता गांव मंे छोटी किराने की दूकान चलाते है तथा परिवार के लिये बच्चे की इतनी महंगी सर्जरी कराना असंभव था। लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के बूते मासूम वंश की निःशुल्क सफल कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी संभव हुई, अब परिवार सरकार की इन योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त कर रहा है।
दोनो मासूमो की सफल कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी 24 जुलाई को जयपुरिया अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ (ईएनटी) एवं कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जन डॉ मुकेश डागुर के नेतृत्व में सफलतापूर्वक की गई जिसमें शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ विभुति, डॉ प्रिया, एनेस्थिसिया विशेषज्ञ डॉ विवेक, डॉ रोहताश एवं डॉ अक्षय का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। ऑपरेशन थियेटर स्टॉफ भाईचंद, अमित एवं अशोक ने भी सर्जरी में पूरा सहयोग दिया।
डॉ मुकेश डागुर ने बताया कि सर्जरी के 21 दिन बाद कॉक्लियर इम्प्लांट का स्विच ऑन किया जायेगा, जिसके बाद बच्चे ध्वनियों को सुनना शुरू कर देंगे। इसके बाद लगभग दो वर्षो तक निःशुल्क स्पीच एवं ऑडिटरी वर्बल थेरेपी राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी। जिससे दोनो मासूम सामान्य सूनने, बोलने व भाषा विकास की क्षमता प्राप्त कर सकेंगे।
सीएमएचओ डॉ हेमन्त कुमार बिन्दल ने बताया कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत चार वर्ष से कम आयु के पात्र बच्चो की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी, इम्प्लांट डिवाइस तथा पुर्नवास सेवायें पूरी तहत से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। प्रत्येक काक्लियर इम्प्लांट सर्जरी पर 5 लाख से अधिक का खर्च होता है।
आरबीएसके कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ सुरेश मीणा ने बताया कि जितनी कम उम्र में कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की जाती है, उतने ही बेहतर परिणाम प्राप्त होते है। इसलिये जन्म के बाद श्रवण जांच, समय पर पहचान एवं शीघ्र उपचार बच्चो को सुनने, बोलने और भाषा विकास के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
आरबीएसके और मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना ने संवारी दो मासूमों की जिन्दगी
