कलयुग में परमात्मा का नाम ही मनुष्य को सद्गति प्रदान करता है – महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन
-श्री विष्णु यज्ञ, हरि सिद्धेश्वर महादेव रुद्राभिषेक एवं काशी की तर्ज पर गंगा आरती बनी आकर्षण का केंद्र
भीलवाड़ा, 17 मई। सनातन पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत रविवार को श्री हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर के तत्वावधान में विभिन्न धार्मिक आयोजनों का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत विशाल कलश यात्रा से हुई। इसके बाद हरी शेवा धाम में श्री विष्णु यज्ञ, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक, श्रीराम कथा, गंगा आरती एवं हरिनाम संकीर्तन के आयोजन प्रारंभ हुए, जो पूरे पुरुषोत्तम माह तक निरंतर चलेंगे। रविवार प्रातः बालाजी मार्केट स्थित बालाजी मंदिर से संत-महंतों के सानिध्य में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर धार्मिक गीतों के साथ यात्रा में सहभागिता निभाई। हरी शेवा धाम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सानिध्य में आयोजित इस यात्रा में निंबार्क आश्रम के महंत मोहन शरण जी शास्त्री, काठिया बाबा बनवारी शरण जी, संत मायाराम जी, संत गोविंदराम जी, महंत रामदास जी रामायणी एवं पंडित मुरारी पांडे सहित अनेक संतजन मौजूद रहे।
मुख्य यजमान जयराम दास – वर्षा एवं अभीचंदानी परिवार, अहमदाबाद, यात्रा में विशेष रूप से सम्मिलित हुए। कलश यात्रा बालाजी मंदिर से प्रारंभ होकर गोल प्याऊ चौराहा, सरकारी दरवाजा, बाजार नंबर 3, पुराना शिक्षा विभाग एवं वीर सावरकर चौक होते हुए हरी शेवा धाम पहुंची, जहां विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई।
कलश यात्रा में पल्लवी वच्छानी, अलका जोशी, खुशबू शुक्ला, मनीषा जाजू, रेखा सोनी, मंजू तंबोली, वर्षा सखरानी, वर्षा मोटवानी, शिवानी भरावा तथा दुर्गा शक्ति अखाड़ा की कविता छीपा सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं अखाड़े की बहनों ने सहभागिता निभाई।
इसके पश्चात आचार्य पंडित रोशन शास्त्री के सानिध्य में श्री विष्णु महायज्ञ तथा उपाचार्य पंडित सत्यनारायण शर्मा के मुखारविंद से सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रुद्राभिषेक प्रारंभ हुआ। यज्ञ में मुख्य यजमान जयराम – वर्षा अभीचंदानी, अहमदाबाद के साथ बड़ौदा की कोशी नौतानी, संत मायाराम एवं अशोक मूंदड़ा सहित श्रद्धालुओं ने आहुतियां दी। दोपहर में हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास जी महाराज के मुखारविंद से श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के दौरान उन्होंने पुरुषोत्तम मास की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि कलयुग में परमात्मा का नाम ही मनुष्य को सद्गति प्रदान करता है। भूलवश भी यदि कोई भगवान का नाम ले लेता है तो उसके जीवन का कल्याण हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रभु नाम से ही सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास जी उदासीन ने सनातन परंपरा में श्री राम कथा’ की महिमा पर केंद्रित प्रसंग का सार बताए हुए सबसे पहले भगवान गणेश, माता सरस्वती और अपने उदासीन संप्रदाय के आदि-गुरु श्री चंद्र भगवान एवं गुरुदेव का स्मरण करते हैं। भाव: “बिनु गुरु कृपा होइ न ज्ञान ” अर्थात् गुरु की कृपा के बिना ईश्वर की कथा को समझना असंभव है। उन्होंने कहा कि कथा की निर्विघ्न समाप्ति और श्रोताओं के मन की शुद्धि के लिए मंगलाचरण किया जाता है। पूज्य जगदीश दास जी महाराज अपने मुखारविंद से समझाते हैं कि राम कथा केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला है। भव-रोग की दवा है। राम कथा इस कलियुग में मानसिक तनाव, अहंकार और दुखों को दूर करने वाली संजीवनी बूटी है।
संसार की भौतिक वस्तुएं सुख दे सकती हैं, लेकिन आंतरिक शांति केवल ‘राम नाम’ और उनकी कथा के श्रवण से ही संभव है। कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज जी गोस्वामी तुलसीदास जी रचित श्री रामचरितमानस के प्रसंगों पर कहा की त्रेतायुग में जब भगवान श्री राम माता सीता के वियोग में वन-वन भटक रहे थे, तब माता सती को उनके ब्रह्म (ईश्वर) होने पर संदेह हो गया था। इसी संदेह और मोह के कारण सती का त्याग हुआ और अगले जन्म में वे पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्मी । माता पार्वती ने भगवान शिव (कैलाशपति) से प्रश्न किया कि “हे नाथ! वही राम कौन हैं जिनकी महिमा का गान आप दिन-रात करते हैं? क्या वे अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र हैं या कोई अजन्मा ब्रह्म हैं ?”. उन्होंने भगवान शिव माता पार्वती की इस पवित्र जिज्ञासा को देखकर अत्यंत प्रसन्न होते हैं और उन्हें राम कथा सुनाना प्रारंभ करते हैं। राम ही ब्रह्म हैं: शिव जी समझाते हैं कि जो सच्चिदानंद स्वरूप, अजन्मा और सर्वव्यापक ब्रह्म हैं, वही भक्तों के प्रेम के वश होकर मनुष्य रूप में लीला करने धरा पर अवतरित होते हैं। शिव जी कहते हैं कि यह कथा सबसे पहले उन्होंने अपने मन में रची थी, इसलिए इसे ‘रामचरितमानस’ कहा जाता है। महामंडलेश्वर जगदीश दास जी उदासीन ने ‘राम’ नाम की अलौकिक शक्ति पर प्रकाश डालते हैं। सत्संग दुर्लभ है: “बिनु सतसंग बिबेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।” बिना प्रभु की विशेष कृपा के मानव को सत्संग और कथा सुनने का सौभाग्य नहीं मिलता। महाराज जी सभी भक्तों को प्रेरित करते हैं कि कथा को केवल कानों से सुनना नहीं है, बल्कि भगवान राम के चरित्र (मर्यादा, त्याग और प्रेम) को अपने जीवन में उतारना ही कथा का असली प्रसाद है। धार्मिक आयोजन की सेवा में सुरेश गोयल, चांदमल सोमानी, हीरालाल गुरनानी, रविंद्र जाजू, हनुमान अग्रवाल, हेमनदास भोजवानी, रमेश मूंदड़ा, बाबूलाल गायकवाड़ एवं बाबूलाल टाक सहित अनेक गणमान्यजन सक्रिय सहयोग कर रहे हैं। आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। जिनमें प्रतिदिन प्रातः 7 बजे श्री विष्णु यज्ञ, प्रतिदिन प्रातः 10 बजे रुद्राभिषेक, 25 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3 से 6 बजे श्रीराम कथा, 26 से 30 मई तक भक्तमाल कथा, व्यासपीठ पर स्वामी जगद्गुरु ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज रहेंगे, 31 मई को पंडित गौरीशंकर शास्त्री के सानिध्य में सत्यनारायण कथा एवं पूर्णिमा उद्यापन 1 जून से 7 जून तक जबलपुर के स्वामी अशोक नंद जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद भागवत कथा 8 जून से 14 जून तक काशी के डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज के सानिध्य में श्री शिव महापुराण कथा
पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन 15 जून को संत समागम, यज्ञ पूर्णाहुति, पाठ-पारायण पूर्णाहुति, गंगा आरती एवं रामधुन विश्राम के साथ महोत्सव का समापन होगा।
