उदयपुर। माकपा की पूर्व पोलिट ब्यूरो सदस्य, आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद बृन्दा करात ने कहा कि राम मंदिर में चोरी देश का सबसे बडा घोटाला है। यह करने वाले भी और कोई नहीं भाजपा व आरएसएस द्वारा रखे गए लोगों द्वारा किया गया है। राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर जिम्मेदारो पर कार्रवाई होनी चाहिए।
इस सारे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह मौन है। वे कुछ नहीं बोल रहे हैं। वे कोई भी एक्शन नहीं ले रहे जबकि वहां योगी आदित्यनाथ योगी की उत्तर प्रदेश सर प्रदेश में आपकी ही सरकार है जो उसकी पैरवी करते हुए बता रहे हैं डेटा नहीं है उनके पास। पैसा इकटृठा करने के लिए तो वे बार बार दोहरा रहे थे और अभी डेटा नहीं है उनके पास। यह सब लीपा पोती करके जिन लोगों ने पैसा लूट लिया है उनको बचाने का एसआईटी काम कर रही है। यह आज स्पष्ट है। वृंदा करात ने कहा कि इस मामले मे सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप होना चाहिए और जितने भी लोग इस ट्रस्ट के है उनको चुन चुन कर हटाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा कहकर सत्ता में आई भाजपा पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपने रिश्तेदारों को बेश कीमती 168 एकड़ जमीन अपने रिश्तेदारों को बांट दी और एक केंद्रीय मंत्री को करोड़ों की सब्सिडी मिल गई! उन्होंने कहा कि सांसद, विधायकों को डरा कर या खरीद कर पार्टिया तोड़ी जा रही है।
दिल्ली के जंतर मंतर पर काक्रोज जनता पार्टी की ओर से नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन को सही ठहराते हुए वृंदा करात ने कहा कि उनकी मांग बिलकुल सही है। जब नीट को लेकर इतना जबरदस्त भ्रष्टाचार हुआ है लाखों स्टूडेंट्स इफेक्टिड हुए हैं। इतने बच्चों ने आत्महत्या की है। इनमें राजस्थान के भी है। हमें पता है वह लडका इतने गरीब परिवार का था। पिता लोन लेकर उनको कोचिंग करा रहे थे। अच्छा एग्जाम दिया बच्चे ने लेकिन जब पता चला कि एग्जाम ही रद्द हो गया और फिर दुबारा पैसा नहीं था कोचिंग के लिए तो उसने आत्महत्या कर ली। काक्रोज पार्टी ने सही मांग उठाई है कि धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा दे। वे भी धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफे के साथ साथ मांग करती है कि परीक्षा करा रही प्राइवेट एजेंसी को रद्द करना चाहिए और हर राज्य को अधिकार मिलना चाहिए जैसे पहले होता था कि वह परीक्षा आयोजन करे। उसकी पूरी जवाबदेही होनी चाहिए। वे पूरी तौर पर जो आंदोलन जंतर मंतर पर चल रहा है और जो आंदोलन की मुख्य मांग है उन्होंने जो हिम्मत दिखाकर लगातार आंदोलन कर रहे है निश्चित रूप से वे उनका समर्थन करते है।
जनजाति क्षेत्र में वर्षो से चले आ रहे जंगल जमीन जन आंदोलन के बारे में वृंदा करात ने कहा कि यहां राजस्थान की सरकार ने कानून की धज्जियां उडा दी है। यहां के आंकडे देखे, जो हमारे आंकडे नहीं है ये वे आंकडे हैं जो सरकार ने दिए है। इसी उदयपर में देख लिजिए लगभग 22 हजार क्लेम हैं उसमें से 43 प्रतिशत ही क्लेम सेटल किए। उदयपुर में शनिवार को हुई बैठक में आए आदिवासियों ने कहा कि यहां इतना बडा घोटाला है ये कहते हैं आॅनलाइन भरो। आॅन लाइन तो आता ही नहीं है ओैर जब वे फार्म लेने के लिए जाते हैं तब वे फार्म देते नहीं है और तब पटवारी पता नहीं किसी से पैसे लेकर जहां 10 बीघा, 15 बीघा, 20 बीघा का अधिकार बनता है वहां दो बीघा देकर बाकी सब सरकार के खजाने में वापस चला जाता है। आदिवासियों के साथ राजस्थान में बहुत बडा अन्याय चल रहा है इसको लेकर आने वाले दिनों में आदिवासी अधिकार मंच बहुत बडा आंदोलन शुरू करेगा। इस मौके पर माकपा जिला सचिव एडवोकेट राजेश सिंघवी, डॉ हेमेन्द्र चण्डालिया भी उपस्थित रहे।
