उदयपुर 24 अप्रेल, 2026। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर की अनुसंधान परिषद् की 22वीं बैठक शुक्रवार 24 अप्रेल, 026 को अनुसंधान निदेशालय में विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। अनुसंधान परिषद बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष पर्यन्त अनुसंधान कार्यो की समीक्षा एवं मूल्यांकन के साथ आगामी वर्षों की अनुसंधान रूपरेखा तैयार की जाती है। इस समीक्षा बैठक में प्रख्यात विशेषज्ञ के रूप में डॉ. रवि कुमार माथुर, निदेशक, भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद एवं डॉ. देव व्रत सिंह, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक (फार्म मशीनरी) भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर उपस्थित रहे। इस अवसर पर वैज्ञानिकों को सम्बोधित करते हुए एमपीयूएटी के कुलगुरू डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान में कम वैज्ञानिक होते हुए भी अपनी उत्कृष्टता साबित कर रहा है।
हमारे संस्थान ने विभिन्न फसलों की कई उन्नत नई किस्मों के विकास के साथ गुणवत्ता अनुसंधान प्रपत्रों का प्रकाशन किया। वैज्ञानिकों ने वर्ष 2024 एवं 2025 में 08 व्यक्तिगत सम्मान एवं 2 परियोजनाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त किये। कुलगुरू ने वैज्ञानिकों को अपने अनुसंधान कार्य को समय व स्टेक होल्डर की आवश्यकतानुसार सृजित करने को कहा जिससे समाज के हर तबके जैसे कि उत्पादक, विपणनकर्ता एवं उपभोक्ताओं को हमारे अनुसंधान लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि हमें अनुसंधान परियोजनाओं को विश्वविद्यालय की आय अर्जन की संभावनाओं को लक्ष्य बना कर करनी चाहिए साथ ही विश्वास जताया कि नई तकनीकियों एवं पेटेन्टस् के द्वारा विश्वविद्यालय की आय के साधन बढ़ेगें। डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि अनुसंधान परियोजनाओं के तकनीकी कार्यक्रम को राष्ट्रीय लक्ष्य को आधार मानते हुए करनी चाहिए एवं हर अनुसंधान का परोक्ष व अपरोक्ष लाभ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचनाओं, मांग आपूर्ति व कृषक जगत को सुदृढ़ करने में होना चाहिए। कुलपति महोदय ने बैठक विशेष आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. रवि कुमार माथुर, निदेशक, भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद एवं डॉ. देव व्रत सिंह, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक (फार्म मशीनरी) भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर का स्वागत किया।इस अवसर पर डॉ. रवि कुमार माथुर, निदेशक, भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को बायो पोलीमर से संबंधित अनुसंधान हेतु भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।उन्होंने समन्वित कृषि एवं फसल प्रणाली पर जोर देते हुए उन्नत तकनीकों के प्रभाव विश्लेषण करने, पेटेन्ट का व्यवसायिकरण करने, तकनीकी का मानचित्रण करने, संरक्षित कृषि पर अनुसंधान करने को महत्वपूर्ण बताया। बैठक में आमंत्रित डॉ. देव व्रत सिंह, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक (फार्म मशीनरी) भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय, उदयपुर के कार्य क्षेत्र में काम आने वाली किसान हितोपयोगी मशीनों को सुविधानुसार रूपान्तरित करके अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा को केवल नौकरी नहीं समझें इसको एक जुनुन की तरह लेना चाहिए। बैठक के प्रारम्भ में अनुसंधान निदेशक डाॅ. अरविन्द वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में 31 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं के साथ कुल 91 परियोजना संचालित हो रही है। कुलपति प्रताप सिंह, डॉ. रवि कुमार माथुर, निदेशक, भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद एवं डॉ. देव व्रत सिंह, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक (फार्म मशीनरी) भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर का स्वागत किया। डॉ. वर्मा ने विगत 21वीं अनुसंधान परिषद् बैठक में लिये गये निर्णयों की अनुपालना रिपोर्ट एवं विश्वविद्यालय के गत 2 वर्षों में किये गए कृषि अनुसंधान पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
बैठक में अनुसंधान निदेशालय के विभिन्न वैज्ञानिकगणों द्वारा लिखित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तकनीकी प्रगति बुलेटिन का विमोचन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के निदेशक, सभी संघटक महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्रों के निदेशक, विश्वविद्यालय के परियोजना प्रभारी, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष एवं कृषि विभाग राजस्थान सरकार के अधिकारी उपस्थित थे।
एमपीयूटीः 22वीं अनुसंधान परिषद की बैठक सम्पन्न
