सम्मेदशिखर से लाइव : उदयपुर के यात्रियों ने 27 किलोमीटर की पहाड़ी यात्रा कर शिखर जी पहुंचे, पहाड़ों पर लगे भगवान के जयकारे

– तलहटी से पहाड़ तक सफेद वस्त्र, टोपी और हाथों में लकड़ी लेकर चले तीर्थायन ट्रेन के यात्री
– पारसनाथ मंदिर और जल मंदिर में भगवान के दर्शन कर यात्री बोले सफल हुई यात्रा
– सकल जैन समाज के 1008 यात्रियों का दल सम्मेदशिखर में

उदयपुर, 22 मई। बुधवार की रात को सम्मेदशिखर के मधुवन तलहटी की सडक़ों पर सन्नाटा था लेकिन रात की एक बजने के साथ ही ध्वल वस्त्रों में उदयपुर के तीर्थायन के तीर्थ यात्रियों के कदम हाथों में लकड़ी लेकर आगे बढ़ रहे थे। धीरे-धीरे ये कारवां बढ़ता ही गया और तडक़े पांच बजे तक भोमया जी मंदिर के मार्ग में यात्री आगे बढ़ते जा रहे थे। जैसे ही पहाड़ी चढ़ाई कर जब शिखरजी पर पारसनाथ मंदिर यात्री पहुंचे तो वहां पहाड़ी पर उदयपुर के इन यात्रियों ने भगवान का जयकारा लगाया। पूरी पहाड़ी पर हरियाली के बीच श्वेत वस्त्र के साथ तीर्थ यात्री ही दिख रहे थे। सामाजिक संस्था श्री महावीर युवा मंच संस्थान की स्पेशल एसी ट्रेन में 1008 यात्री मंगलवार को पारसनाथ रेलवे स्टेशन से मधवुनी पहुंचे। यहां विश्राम के बाद रात को पहाड़ी चढ़ाई की यात्रा शुरू की।


शिखरजी की चढ़ाई से पहले भोम्या जी के द्वार
्रमुख्य संरक्षक राजकुमार फत्तावत ने बताया कि शिखर जी की यात्रा की शुरूआत बुधवार तडक़े सबसे पहले भोमया जी के मंदिर से शुरू हुई। रात एक बजे से यात्री अपने-अपने ठहरे स्थान से रवाना हुए और सबसे पहले मधुवन में भोमयाजी मंदिर पहुंचे। मंदिर में भगवान के दर्शन कर नारियल चढ़ाकर पहाड़ी यात्रा सफल कराने की प्रार्थना के साथ अपने कदम आगे बढ़ाए। रात एक बजे से यात्रियों की यात्रा का कारवां शुरू हुआ जो तडक़े तक चलता रहा। फत्तावत ने बताया कि चार बजे पहले निकले यात्रियों ने पूरी पहाड़ यात्रा पैदल की और उसके बाद गए यात्री जिसमें  सीनियर सिटीजन और पैदल नहीं चल पाने वाले यात्री थे जो बाइक और डोली से रवाना हुए।
सिर पर टोपी, हाथों में लकड़ी और जयकारा की गूंज
तलहटी से शुरू हुई यात्रा में पहाड़ी पर जाने वाली पगडड़ी के जरिए यात्रियों में पूरा उत्साह देखा गया। भगवान की जयकारों के साथ कदम आगे बढ़ाते गए। सफेद कलर के ड्रेस कोड में यात्रियों ने एकता दिखाते हुए आगे निकले, उनके सिर पर टोपी और हाथों में मदद के लिए लकड़ी थी। यात्री एक-एक कदम बढ़ाते हुए पहाड़ पर चढ़ते गए। जैसे ही थकान का अहसास होने लगता तो वे भगवान के जयकारे लगाते और फिर अपने कदम बढ़ाते गए।
बाइक से यात्री डाक बंगला पहुंचे
यात्रा के मुख्य संयोजक संजय भंडारी ने बताया कि बाइक से जाने वाली यात्रियों की यात्रा भी भोमया जी मंदिर से ही शुरू हुई। यहां से यात्री सीधे बाइक पर सवार होकर पहाड़ी पर डाक बंगला पहुंचे। वहां से पैदल उन्होंने पारसनाथ मंदिर का सफर किया। इस दौरान कुछ यात्री आगे जल मंदिर और सबसे ऊंचाई पर स्थित चंद्रप्रभु मंदिर भी गए। कुछ यात्रियों ने पारसनाथ मंदिर से आगे के मंदिरों के लिए डोली की। भंडारी ने बताया कि कई यात्रियों ने भोमया जी मंदिर से ही डोली से यात्रा की शुरूआत की। सुबह जल्दी निकलने वाली यात्री दोपहर तक मंदिरों में दर्शन कर पहाड़ी से नीचे तलहटी में पहुंच गए।


कटारिया भी डोली से पहुंंचे शिखर जी
इस यात्रा में सीधे मधुवन में शामिल हुए असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया भी सुबह अपनी पत्नी अनिता कटारिया के साथ शिखर जी की यात्रा के लिए डोली से रवाना हुए। कटारिया सबसे पहले पारसनाथ जैन मंदिर पहुंचे और वहां दर्शन के बाद वे जल मंदिर पहुंचे। जल मंदिर में दर्शन के बाद कुछ समय विश्राम कर वापस तलहटी के लिए रवाना हुए। इधर, यात्रा में उदयपुर से साथ चल रहे उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने भी शिखर जी तक की यात्रा की।
जल मंदिर पर सुबह का नाश्ता किया
अध्यक्ष अशोक कोठारी, महामंत्री विजयलक्ष्मी गलूंडिया ने बताया कि यात्रियों के लिए सुबह के नाश्ते का प्रबंध पहाड़ी पर जल मंदिर में किया गया। मंदिरों के दर्शन के बाद यात्री सीधे जल मंदिर पहुंचे जहां पर दर्शन के बाद नाश्ता किया। ट्रेन की टीम ने नीचे तलहटी से नाश्ता तैयार करवा कर पहाड़ी पर जल मंदिर तक डोली से पहुंचाया और वहां पूरा प्रबंध कर नाश्ता करवाया।
तलहटी से शिखर तक 27 किमी की यात्रासमन्वयक चंद्रप्रकाश चोरडिय़ा व  सह संयोजक सुधीर चित्तौड़ा ने बताया कि सम्मेद शिखर जी की पर्वत यात्रा कुल 27 किमी की है।  इसमें 9 किमी की चढ़ाई, 9 किमी का उतार और 9 किमी की पर्वत पूजा है। पर्वत पर जाने वाले यात्रियों ने रात करीब एक बजे से ही तलहटी में अपने आवास स्थल से यात्रा शुरू कर दी।
रात को भजन संध्या के साथ हुआ सम्मान समारोह
इधर, मंगलवार रात को मधुवन में सिद्धायतन कैंपस के बैंक्वेट हॉल में भजन संध्या और सम्मान समारोह हुआ। भक्तों और कलाकारों ने एक से बढकऱ एक गीतों से भक्ति में भक्तों को डूबो दिया। भगवान पारसनाथ के भजनों पर सब भक्तों ने पूरा साथ दिया और माहौल भक्तिमय बना दिया।
इस समारोह में असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन अतिथि थे। कटारिया ने इस मौके पर कहा कि उदयपुर से अपने यात्री आए और मुझे बताया तो मेरा मन हो गया मै अपनों का स्वागत भी करो और उनकी यात्रा में शामिल हूं। इतना सा भाव था और यहां पहुंच गया। कटारिया ने कहा कि इस यात्रा में कई सीनियर सिटीजन शामिल हुए तो इससे लगता है कि शिखर जी दर्शन के भाव जगे और उनकी यात्रा पूरी हो रही। इस अवसर पर कटारिया ने स्पेशल ट्रेन की टीम का सम्मान किया। विजयलक्ष्मी गलूंडिया ने नवकार महामंत्र के जाप से कार्यक्रम शुरू हुआ।

्रमुख्य संरक्षक राजकुमार फत्तावत, यात्रा के मुख्य संयोजक संजय भंडारी,अध्यक्ष अशोक कोठारी, महामंत्री विजयलक्ष्मी गलूंडिया, समन्वयक चंद्रप्रकाश चोरडिय़ा, सह संयोजक सुधीर चित्तौड़ा,  राजकुमार गन्ना, भूपेंद्र गजावत आदि का सम्मान किया। इसके अलावा कोच प्रभारी जितेंद्र सिसोदिया, संजय भंडारी, भगवती मोदी, महेंद्र कोठारी, भूपेंद्र चोरडिय़ा, कमलेश कच्छारा, मनीष गलूंडिया, विजय लक्ष्मी गलूंडिया, राजेंद्र जैन, सुरेश जैन, प्रवीण नवलखा, मुकेश जैन, वीरेंद्र धन्नावत, निर्मल जैन, कपिल-अंजलि सुराणा, सुधीर चित्तौड़ा, नितिन लोढ़ा, राकेश छाजेड़, अरुण मेहता, संदीप कोठारी, राकेश नंदावत, संदीप कावडिय़ा, प्रणय फत्तावत, चंद्रप्रकाश चोरडिय़ा, राजकुमार जैन, राजराजेश्वर जैन, मुकेश जैन, अशोक कोठारी, बलवंत रांका, दिलीप मेहता, राजकुमार गन्ना, भरत जैन, ललित शर्मा, अनुकूल जैन, दीपक बोल्या, हजारी जैन, शीतांशु गन्ना, भूपेंद्र गजावत, दीपक सिरोया और जितेंद्र वेलावत का भी सम्मान किया।

आज सम्मेदशिखर से महाकाल के लिए होंगे रवाना
फत्तावत ने बताया कि यात्री गुरुवार सुबह सम्मेदशिखर की तलहटी मधुवन से पारसनाथ रेलवे स्टेशन के लिए बसों से रवाना होंगे। वहां से वे ट्रेन से उज्जैन महाकाल के लिए रवाना होंगे। शुक्रवार दोपहर में महाकाल पहुंचेंगे और रात्रि विश्राम भी होगा।

By Udaipurviews

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