देवेंद्र धाम में प्रवचन सभा में बोले,मानव जीवन को संयम, अनुशासन और सद्कार्यों से बनाएं सार्थक
उदयपुर। जन्म और मरण जीवन के शाश्वत सत्य हैं, लेकिन इनके बीच मिला मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन का सदुपयोग करते हुए इसे नियम, अनुशासन, संयम और सद्कार्यों से सार्थक बनाना चाहिए। यह विचार डॉ.राजेंद्र मुनि ने 3 सितंबर को देवेंद्र धाम में आयोजित प्रवचन सभा में व्यक्त किए।
डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता केवल व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि संयमित एवं व्यवस्थित जीवन जीते हुए समाज और राष्ट्र के हित में योगदान देने में है। व्यक्ति के जीवन में नियम और नीति का गहरा संबंध है। नियमों का पालन जीवन को अनुशासित बनाता है और कार्यों को सफलता की दिशा में ले जाता है।
इस अवसर पर डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि संसार की प्रत्येक व्यवस्था निश्चित नियमों और मर्यादाओं पर टिकी हुई है। प्रकृति भी अपने नियमों के अनुसार संचालित होती है। वर्षा समय और आवश्यकता के अनुरूप होती है, अग्नि अपनी मर्यादा में रहती है और प्रकृति के सभी तत्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कार्य करते हैं। जब प्रकृति अपने नियमों से विचलित नहीं होती तो मनुष्य को भी अपने जीवन में नियम और मर्यादा का पालन करना चाहिए।
डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि मर्यादा में रहकर कार्य करने वाला व्यक्ति अपनी शक्ति और सामर्थ्य का सही उपयोग कर सकता है। अनुशासन व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने के साथ उसके जीवन में स्थिरता और सफलता का आधार बनता है। वहीं नियमहीन जीवन व्यक्ति को लक्ष्य से भटका सकता है। सभा में उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि द्वारा मंगलकामना व्यक्त की गई। श्रीसंघ अध्यक्ष एडवोकेट रोेशनलाल जैन,महामंत्री हिम्मत बड़ाला,सहित अन्य ने जोधपुर के पीपाड़,नाथद्वारा,सेरत से आये श्रावकांे एवं समाजसेवियों का बहुमान किया गया। शील जयन्ती के उपलक्ष में रमेश पुष्पा खोखावत द्वारा सामूहिक एकासन तेले तप का आयोजन किया गया। कृष्णजन्माष्टमी एवं शील जयन्ती कार्यक्रम कल प्रातः 9 बजे देवेन्द्र धाम में आयोजित होगा।
