उदयपुर। श्री तैलिक साहू समाज पंच महासभा (छः बैठक) उदयपुर द्वारा माहेश्वरी सेवा सदन में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तीसरे दिन श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिकता के रंग में रंग गए। परम पूज्य गुरुदेव श्री अनंतराम रामजी शास्त्री ने अपने अमृतमय प्रवचनों में श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो उठा।
गुरुदेव ने कहा कि मानव जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है और इसके लिए भगवान की निष्काम भक्ति ही सर्वाेत्तम साधन है। उन्होंने बताया कि यह शरीर पंचतत्वों से निर्मित है तथा जब मनुष्य प्रकृति में व्याप्त ईश्वर के स्वरूप को पहचान लेता है, तब उसके भीतर का भेदभाव समाप्त हो जाता है। ईश्वर कण-कण में विद्यमान हैं और उनकी अनुभूति ही जीवन का वास्तविक आनंद है।
प्रवचन के दौरान गुरुदेव ने भगवान के वराह अवतार एवं नरसिंह अवतार की महिमा का वर्णन करते हुए धर्म, सत्य और सदाचार के महत्व को प्रतिपादित किया। वहीं शिव-पार्वती विवाह प्रसंग की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा स्थल पर उपस्थित भक्तजन भगवान के जयघोष के साथ भक्ति में झूम उठे।
समाज महामंत्री कन्हैयालाल नैनावा ने बताया कि गुरुकृपा गौशाला महिला मंडल की पुष्पा बेन, चन्द्रकला बेन एवं उनकी सहयोगी महिलाओं ने कथा में सहभागिता निभाते हुए समाज को सत्य, सदाचार और श्रेष्ठ कर्मों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि अच्छे कर्म ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी हैं, जो जीवनभर उसका मार्गदर्शन करते हैं।
समाज अध्यक्ष हेमेंद्र पंडियार ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत आयोजित उद्यापन कार्यक्रम के लिए ब्राह्मण भोज की रसीदें कथा स्थल पर ही जमा की जा रही हैं। कथा संयोजक जगदीश पंडियार ने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद समाजबंधुओं एवं सनातन धर्म प्रेमियों का उत्साह निरंतर बढ़ रहा है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु पहुंच रहे हैं।
कोषाध्यक्ष भरत पचलोड़िया ने बताया कि समाज के आह्वान पर भामाशाहों द्वारा श्रीमद्भागवत कथा एवं पुरुषोत्तम मास के धार्मिक आयोजनों के लिए स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे आयोजन को भव्यता मिल रही है।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव-पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का आनंद लेते हुए धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कथा स्थल पर संपूर्ण वातावरण हरिनाम संकीर्तन और जयघोषों से गुंजायमान रहा।
शिव-पार्वती विवाह की दिव्य झांकी से भक्तिरस में सराबोर हुआ कथा पंडाल, गुरुदेव ने बताया मोक्ष का सरल मार्ग
