विद्या भवन सरस्वती मैकट्रॉनिक्स  सेंटर में   इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें
स्मार्ट फैक्ट्री के लिए स्मार्ट इंजीनियर जरूरी : डॉ अनिल मेहता 
पीएलसी से स्काडा तक, उद्योगों की नई तकनीकों का  प्रशिक्षण
उदयपुर, 4 जुलाई। तेजी से बदलती औद्योगिक तकनीकों और उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल डिप्लोमा इंजीनियर तैयार करने के उद्देश्य से विद्या भवन पॉलिटेक्निक महाविद्यालय के  सरस्वती मैकट्रॉनिक्स  सेंटर  में डिप्लोमा इंजीनियरिंग इंटर्न काप्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को प्रारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए   प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि  ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, , सीमेंट, स्टील, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल, फूड प्रोसेसिंग,  केमिकल , जल प्रबंधन, ऊर्जा, माइनिंग तथा अन्य मैन्युफैक्चरिंग  उद्योगों में स्वचालित मशीनों और डिजिटल नियंत्रण प्रणालियों  से ही कार्य हो रहा है जिसे इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को सीखने की जरूरत है। स्मार्ट फैक्ट्री में  स्मार्ट इंजिनियर ही कार्य कर सकते है।
डॉ मेहता ने कहा कि स्मार्ट इंडस्ट्री प्रक्रियाओं  में पीएलसी  आधुनिक मशीनों एवं उत्पादन लाइनों का नियंत्रण करता है। स्काडा संपूर्ण औद्योगिक प्रक्रिया की वास्तविक समय में निगरानी एवं नियंत्रण सुनिश्चित करता है।जबकि,  सीएनसी तकनीक  उच्च परिशुद्धता वाले औद्योगिक उत्पादों के निर्माण का आधार है। इसी प्रकार  न्यूमेटिक  एवं हाइड्रोलिक  प्रणालियां रोबोटिक्स, प्रेस मशीनों, मटेरियल हैंडलिंग तथा ऑटोमेशन आधारित  उत्पादन इकाइयों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन तकनीकों का ज्ञान आज प्रत्येक आधुनिक उद्योग की आवश्यकता बन चुका है।
डॉ मेहता ने बताया कि सरस्वती सिंघल फाउंडेशन ने  मेकेट्रोनिक्स सेंटर स्थापित कर तकनीकी युवाओं के लिए  यह ज्ञान व प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध करवाई है। प्रेरणा स्रोत उद्योगपति सलिल सिंघल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए डॉ मेहता ने प्रशिक्षणार्थियों   से आह्वान किया कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए अपनी तकनीकी दक्षता के साथ-साथ ईमानदारी, अनुशासन, जिम्मेदारी, सकारात्मक कार्य संस्कृति और मानवीय मूल्यों का भी विकास करें। यही गुण उन्हें उद्योगों में उत्कृष्ट तकनीकी विशेषज्ञ एवं सफल प्रोफेशनल बनने में सहायता करेंगे।
इस अवसर पूर्व उद्योग प्रबंधक एम एस राणावत ने कहा कि
 केवल तकनीकी ज्ञान ही किसी इंजीनियर की सफलता का आधार नहीं होता। उद्योग ऐसे इंजीनियर चाहते हैं जिनमें तकनीकी दक्षता के साथ-साथ संगठनात्मक कार्य संस्कृति को समझने और टीम के साथ प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता भी हो।
 इलेक्ट्रिकल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रकाश सुंदरम ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल उत्पादन प्रणालियों तथा स्वचालित औद्योगिक प्रक्रियाओं के अनुरूप दक्ष बनाना है।
प्रशिक्षक इंजीनियर  नितिन सनाढ्य, गौरांग शर्मा, अमित कुशवाहा,  रमेश चंद्र कुम्हार , पंकज कुमार सिंह ने कहा कि   प्रतिभागियों को  प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर,  सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन, सीएनसी प्रोग्रामिंग, औद्योगिक सेंसर, कंट्रोल पैनल , न्यूमेटिक्स, हाइड्रोलिक्स तथा औद्योगिक ऑटोमेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर , इंटरपर्सनल स्किल्स, टाइम मैनेजमेंट , प्रॉब्लम सॉल्विंग एप्टीट्यूड, टीम वर्क, प्रोफेशनल एथिक्स   का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे विद्यार्थी उद्योगों की कार्य संस्कृति के अनुरूप जिम्मेदार, अनुशासित, नवाचारी एवं समाधान-उन्मुख इंजीनियर के रूप में विकसित हो सकेंगे।
By Udaipurviews

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