विश्वास के साथ कोई काम करने की ठानो तो हर मुश्किल हो जाती हैं आसान

जबलपुर—मध्यप्रदेश के विनय डेरिया ने उदयपुर में चल रही नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता के 68 किलो भार वर्ग में जीता गोल्ड मेडल
उदयपुर। विश्वास के साथ कोई काम करने की ठानो तो मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं। यह कहना है 48 साल के स्ट्रेंथ लिफ्टर खिलाड़ी विनय डेरिया का। जो शारीरिक रूप से 80 फीसदी दिव्यांग हैं। डेरिया मध्यप्रदेश के जबलपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने उदयपुर में चल रही नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग कॉम्पिटिशन में 68 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
एक हाथ पैरालिसिस, अंगूठे से उठा लेते हैं वजन
48 साल के स्ट्रेंथ लिफ्टर खिलाड़ी विनय डेरिया का शरीर 80 फीसदी हैंडिकेप है। वर्ष 2004 में ट्रांसफार्मर से करंट लगने से 15 फीट ऊंचाई से गिर गए थे, जिससे रीड की हड्डी टूट गई और पूरा शरीर पैरालिसिस हो गया था। डेरिया कहते हैं जब वह उस घटना को याद करते हैं तो सिहर उठते हैं। तब इंटरनेट का जमाना नहीं था तथा अपनी मार्केटिंग खुद करनी होती थी। इसीलिए पारिवारिक रेडीमेड कपड़ों का शोरूम के बाहर खंभे पर बैनर लगाते समय वह करंट की चपेट में आ गए और पंद्रह फीट ऊंचाई से सड़क पर आ गिरे। जिसके चलते उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई।
लोग कहते थे अब बिस्तर पर बितानी होगी पूरी जिंदगी
करंट के बाद गिरने की घटना से विनय का पूरा शरीर पैरालिसिस हो गई। एक साल तक हॉस्पिटल में बिताने तथा भरपूर उपचार के बाद भी बिस्तर पर रहना उनकी मजबूर बन गई। रीड की हड्डी टूटने से 3 माह तक गर्दन में हेलो ग्रेसिस स्क्रू के माध्यम से बंधा था। जिससे गर्दन जरा भी नहीं हिल सके। इस दौरान कई बार सर्जरी हुई। आज भी हर यूरिन छोड़ने के लिए हर 15 दिन में कैथेटर चेंज करना पड़ता है। हादसे से पहले भी विनय स्कूल और कॉलेज में एथलेटिक्स में हाईजम्प के बेहतरीन खिलाड़ी रहा। स्कूल और कॉलेज में 6 बार नेशनल खेल चुके और स्टेट लेवल पर 6 बार गोल्ड मैडल जीत चका था। तीन बार वेस्ट जोन में खेलकर चार मैडल जीत चुका था। जिसके चलते उसने इसी क्षेत्र को एक बार फिर चुना। लोग कहते थे अब उसे इसी तरह पूरी जिंदगी बिस्तर पर ही बितानी होगी। किन्तु उसने कुछ और ठान लिया था। जिसके लिए कोशिश भी शुरू की। लोगों के तानों की परवाह किए बगैर 2013 में जिम जोइन किया और रोज 2 घंटे जिम में जी—जान से मेहनत कर अपने शरीर को मजबूत बनाने लगे। विनय के जोश और जुनून ने उन्हें बिस्तर से ही नहीं उठाया बल्कि नेशनल और इंटरनेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग कॉम्पिटिशन का विजेता भी बनाया।
अंगूठे की ग्रिप से उठाते हैं वजन
विनय का लेफ्ट वाला एक हाथ और एक पैर पूरी तरह पैरालिसिस है। लेफ्ट वाला सिर्फ अंगूठा काम करता है जिसकी ग्रिप में रोड को रखते हुए दोनों हाथ से वजन उठाते हैं। दुर्घटना के 10 साल बाद वर्ष 2014 में पहली बार कोलकाता में नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में सिल्वर मैडल जीता। फिर अगले वर्ष ही पंजाब में गोल्ड मैडल जीतकर नेशनल चैंपियन बने। इस बीच वर्ष 2015 से 2019 तक हॉस्पिटल में एडमिनिस्ट्रेटिव की जॉब की। इसके बाद कोविड के 3 साल तक नहीं खेल पाए। फिर वर्ष 2022 में राजस्थान के अलवर और एमपी के जबलपुर में नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में सिल्वर मैडल जीता था। वर्ष 2023 में नेपाल के काठमांडू में हुए कॉम्पिटिशन में ब्रांच मैडल जीता। अब उदयपुर में चल रहे नेशनल कॉम्पिटिशन में भी गोल्ड हासिल किया है।

By Udaipurviews

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