कैचमेंट बिगड़ा, एनीकेट भरे; नांदेश्वर बांध सहित सभी एनीकटों की हो डी-सिल्टिंग
उदयपुर, 2 अगस्त, झीलों में जल आवक के साथ बड़ी मात्रा में सिल्ट, मिट्टी और अन्य प्रदूषक तत्व झीलों में समा रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो झीलों की जलधारण क्षमता और जल गुणवत्ता दोनों गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। यह चिंता रविवार को आयोजित झील संरक्षण समिति संवाद में व्यक्त की गई।
जल विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि वर्षा का पानी अब केवल जल ही नहीं, बल्कि मिट्टी, सिल्ट, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और अन्य प्रदूषक तत्वों को भी बहाकर झीलों तक ला रहा है।
पहले सामान्य वर्षा में पानी धीरे-धीरे झीलों तक पहुंचता था, लेकिन अब थोड़ी बारिश में भी सीसारमा सहित अन्य नदी-नालों में तेज बहाव शुरू हो जाता है और भारी मात्रा में सिल्ट सीधे झीलों में पहुंच रही है। इसका प्रमुख कारण
मदार, बड़ी, पिछोला और फतेहसागर के कैचमेंट क्षेत्र में पहाड़ों की कटाई, पेड़ों की कमी और अनियोजित , अवैध व्यावसायिक निर्माण है।
डॉ. मेहता ने बताया कि जब तक केचमेंट क्षेत्र स्वस्थ नहीं होगा, तब तक झीलें स्वस्थ नहीं रह सकती ।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि नांदेश्वर बांध वर्षों तक पिछोला झील के लिए प्रभावी सिल्ट ट्रैप रहा, लेकिन उसके भर जाने से अब अधिकांश मिट्टी सीधे पिछोला झील में पहुंच रही है। उन्होंने जल संसाधन विभाग को नांदेश्वर बांध सहित समस्त एनीकटो तथा तालाबों की मिट्टी को निकालने , डिसिल्टिंग का सुझाव दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता नंद किशोर शर्मा ने कहा कि कैचमेंट क्षेत्र के गांवों और बस्तियों से अनुपचारित सीवेज तथा ठोस कचरा भी वर्षा जल के साथ झीलों में पहुंच रहा है। इससे जल में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ रही है, जलीय खरपतवार और शैवाल तेजी से फैल रहे हैं तथा झीलों की जैव विविधता प्रभावित हो रही है।
अभिनव संस्थान से जुड़े पर्यावरण प्रेमी कुशल रावल ने कहा कि झीलों को दोहरा नुकसान हो रहा है। एक ओर सिल्ट से उनकी संग्रहण क्षमता लगातार घट रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदूषकों के बढ़ते जमाव से पेयजल गुणवत्ता खराब होगी और लोगों के स्वास्थ्य पर
प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह ने कहा कि अब केवल झीलों की सफाई से काम नहीं चलेगा। पूरे जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण और उपचार को प्राथमिकता देनी होगी।
युवा झील प्रेमी विनोद कुमावत ने मांग की कि कैचमेंट क्षेत्र के गांवों में ठोस कचरा और सीवेज का स्थानीय स्तर पर उपचार सुनिश्चित किया जाए ।
